Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
मध्य प्रदेश में 'ई-प्रवेश' प्रणाली ने बनाया रिकॉर्ड: डॉ. मोहन यादव के विजन से 4.89 लाख छात्रों ने लि... जबलपुर में महिला आरक्षक से पहचान छिपाकर दुष्कर्म और धर्मांतरण का दबाव, एसपी दफ्तर पहुंची पीड़िता “मेरा बेटा राह भर तड़पता रहा...”, मंडला में 108 एंबुलेंस की घोर लापरवाही से 21 साल के युवक की तड़पकर... उज्जैन बनेगी देश की पहली 'सर्प मित्र नगरी': 15 करोड़ की लागत से बनेगा आधुनिक स्नेक पार्क, जानें खूबि... नेपाल में कांवड़ यात्रा से पहले झंडे को लेकर भड़की हिंसा: भारत सीमा से लगे 5 जिलों में कर्फ्यू, सरका... केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: अगले 5 सालों के लिए बढ़ी 'पीएम-किसान' योजना, ₹3.15 लाख करोड़ के बजट को म... भारत में गूगल ने लॉन्च किया Gemini Spark AI एजेंट! आपके बिना ऑनलाइन रहे भी करेगा सारे काम, जानें खास... सावन में करें श्री रुद्राष्टकम स्तोत्र का पाठ: दूर होंगे सभी कष्ट, जानें श्रीराम से जुड़ी कथा, सही स... अर्ली मेनोपॉज और हाई ब्लड प्रेशर का क्या है कनेक्शन? एक्सपर्ट से जानें एस्ट्रोजन हार्मोन का असर और ब... IB अफसर अंकित शर्मा हत्याकांड: ताहिर हुसैन समेत 5 को उम्रकैद, जानें किन पुख्ता सबूतों पर कोर्ट ने सु...

जिनपिंग के मनमानेपन से नाराज कारोबारी भाग रहे हैं

बीजिंगः चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के मनमाने फैसलों ने वहां के औद्योगिक कारोबार पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। इस वजह से वहां के अनेक उद्योगपति अब चुपचाप अपने कारोबार को अन्य देशों में पहुंचा रहे हैं। इसके अलावा चीन के अनेक पैसे वालों ने भी चुपचाप दूसरे देशों की नागरिकता ले ली है क्योंकि उन्हें ऐसा लगता है कि यह सरकार चंद लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए काम कर रही है।

कोरोना महामारी के बीच ही चीन में हर किस्म की औद्योगिक गतिविधियों पर सरकारी नियंत्रण बहुत बढ़ गया है। इससे अनेक लोगों का कारोबार प्रभावित होने लगा है। परेशानियों से बचने के लिए ही ऐसे उद्योगपति दूसरे देशों में अपना कारोबार ले जा रहे हैं जहां उनके स्वतंत्र तौर पर अपना कारोबार बढ़ाने का अवसर प्रदान किया जाता है।

खरबपति लोग भी वर्तमान सरकार के तेवर से भयभीत हैं और अन्य देशों की नागरिकता पैसा देकर हासिल कर रहे हैं। दुनिया के अनेक देशों में एक मुश्त बड़ी रकम के भुगतान पर किसी भी नागरिक को वहां की स्थायी नागरिकता प्रदान करने का नियम चालू कर रखा है।

यह अब धीरे धीरे दुनिया में तेजी से लोकप्रिय होता जा रहा है। अपने देश की सरकार के प्रकोप से बचने के लिए अनेक देशों के लोग इन देशों में नागरिक बन रहे हैं।

चीन में ऐसा होने की वजह से चीन की पूंजी भी तेजी से बाहर जा रही है। चर्चा है कि तीसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद से ही शी जिनपिंग का ऐसा आचरण पहले के मुकाबले और अधिक कठोर हो गया है। एक अंतर्राष्ट्रीय संस्था कि रिपोर् के मुताबिक वर्ष 2022 में चीन के अमीर लोगों ने सबसे अधिक देश छोड़ा है।

इनकी संख्या करीब दस हजार आठ सौ है। इनलोगों के चले जाने के साथ साथ उनकी पूंजी भी देश के बाहर चली गयी है। जिनलोगों ने अपना मुख्यालय चीन में रख छोड़ा है, उनकी गतिविधियां भी सिर्फ कंपनी को चालू रखने भर की रह गयी है। इससे रोजगार के अवसर भी कम हो गये हैं।

चीन के प्रसिद्ध खरबपति और प्रसिद्ध कंपनी अलीबाबा के संस्थापक जैक मे के चीन छोड़ने के बाद इस तरफ दुनिया का ध्यान गया था। इसी तरह अब दूसरे व्यापारियों के भी चीन से चले जाने की वजह से चीन की अर्थव्यवस्था में ऐसे खबरपतियों का पैसा गायब हो गया है। दूसरी तरफ वहां की बैंकिंग नीति से भी लोग परेशान हैं और उसके लिए भी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को जिम्मेदार मानते हैं, जो सिर्फ चंद लोगों को फायदा पहुंचाने वाले फैसले ले रहे हैं।