तीन साल पहले प्रधानमंत्री ने तामझाम से किया था उदघाटन
अभी सिर्फ तीन सौ कार्यालय चालू हैं
कई लोग मुंबई से आये पर लौट गये
लैब के हीरे ने मांग भी कम कर दी
राष्ट्रीय खबर
अहमदाबादः तीन साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3,200 करोड़ रुपये की लागत से बने सूरत डायमंड बूर्श का उद्घाटन करते हुए इसे दुनिया का सबसे बेहतरीन डायमंड हब और सूरत के लिए मोदी की गारंटी का उदाहरण बताया था। पेंटागन को पीछे छोड़कर एक ही परियोजना में दुनिया का सबसे बड़ा कार्यालय स्थान बनने वाला यह 9 टावरों वाला विशाल परिसर आज काफी हद तक खाली पड़ा है।
इस खास परिसर का मुख्य उद्देश्य भारत के हीरा व्यापार को मुंबई से सूरत स्थानांतरित करना था, जो पहले से ही देश का प्रमुख कटिंग और पॉलिशिंग केंद्र है। हालांकि, खजोद स्थित ड्रिम सिटी परियोजना में मौजूद 4,200 हीरा व्यापार कार्यालयों में से वर्तमान में केवल 300 कार्यालय ही चालू हैं। पिछले तीन वर्षों में, एसडीबी अधिकारियों और गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने व्यापारियों को सूरत स्थानांतरित करने के कई प्रयास किए। किरण जेम्स के मालिक वल्लभभाई लखानी नवंबर 2023 में मुंबई से सूरत स्थानांतरित होने वाले पहले व्यापारी थे, लेकिन व्यवसाय न चलने के कारण वे महज डेढ़ महीने के भीतर वापस मुंबई लौट गए। मुंबई के हीरा व्यापारियों का मानना है कि एसडीबी में विश्व स्तरीय सुविधाएं होने के बावजूद सूरत में मुंबई जैसी अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी और आकर्षण नहीं है। इसके अलावा, पिछले कुछ वर्षों से वैश्विक स्तर पर हीरा उद्योग मंदी के दौर से गुजर रहा है।
लैब में तैयार हीरे के बढ़ते प्रभाव, चीन में घटती मांग, रूसी डायमंड कंपनी पर पश्चिमी प्रतिबंधों और यूक्रेन व मध्य पूर्व के युद्धों के कारण प्राकृतिक हीरों की कीमतों में 30 से 50 फीसद तक की भारी गिरावट आई है। रापापोर्ट रिपोर्ट के अनुसार, उच्च वैश्विक स्टॉक और कमजोर मांग के कारण प्राकृतिक पॉलिश किए गए हीरों के दाम पिछले दो दशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं, जिससे इस व्यापार पर बहुत बुरा असर पड़ा है।