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केजी बेसिन का गड़ा मुर्दा फिर से उखड़ने लगा

रिलायंस मामले में रंजना देसाई मध्यस्थ

ओएनजीसी ने लगाया है गंभीर आरोप

कावेरी गोदावरी बेसिन की गैस चोरी

बारह हजार करोड़ से अधिक का दावा

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और केंद्र सरकार के बीच चल रहे कृष्णा-गोदावरी बेसिन गैस माइग्रेशन विवाद को मध्यस्थता के लिए भेजने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई को मध्यस्थ नियुक्त किया है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल पंचोली की पीठ ने यह आदेश तब पारित किया, जब उन्होंने देखा कि दोनों पक्ष स्वयं किसी व्यावहारिक समाधान तक नहीं पहुँच पा रहे हैं। रिलायंस की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत से कहा कि कंपनी मध्यस्थता के लिए तैयार है। पीठ ने कहा कि न्यायमूर्ति रंजना देसाई जटिल वाणिज्यिक विवादों को अच्छे से संभालती हैं और दोनों पक्ष अपनी ओर से एक-एक विषय विशेषज्ञ की मदद ले सकते हैं ताकि मध्यस्थता प्रक्रिया को सुचारू रूप से आगे बढ़ाया जा सके। अदालत ने मामले को चार सप्ताह के बाद आगे के विचार के लिए सूचीबद्ध किया है, जहां पक्षों को मध्यस्थता की प्रगति के बारे में सूचित करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट रिलायंस और उसके कंसोर्टियम साझेदारों (ब्रिटिश पेट्रोलियम और निको) द्वारा दायर उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी गई थी जिसने रिलायंस के पक्ष में पारित 12,800 करोड़ रुपये के मध्यस्थता पुरस्कार को रद्द कर दिया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि यह मध्यस्थता पुरस्कार स्पष्ट रूप से गैर-कानूनी था और सार्वजनिक विश्वास सिद्धांत के खिलाफ था।

यह विवाद अप्रैल 2000 में हस्ताक्षरित प्रोडक्शंस शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट से शुरू हुआ था। 2013 में ओएनजीसी ने आरोप लगाया था कि उसके निकटवर्ती ब्लॉक से गैस बहकर आरआईएल के ब्लॉक में चली गई, जिसे रिलायंस ने निकालकर बेच दिया। 2015 की तकनीकी रिपोर्ट में इसकी पुष्टि होने के बाद केंद्र सरकार ने रिलायंस से 12,800 करोड़ रुपये की मांग की थी, जिसके खिलाफ रिलायंस ने मध्यस्थता की शरण ली थी।