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झारखंड में मतदाता सूची पुनरीक्षण में काफी विरोधाभाष नजर आया

विधानसभा क्षेत्रों के आंकड़ों में भारी अंतर

राष्ट्रीय खबर

राँचीः झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत तार्किक विसंगतियों के निपटारे को लेकर विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के प्रदर्शन में भारी अंतर सामने आया है। बुधवार तक के जारी आंकड़ों के अनुसार, सर्वश्रेष्ठ और सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले विधानसभा क्षेत्रों के बीच निष्पादन दर में 85.31 प्रतिशत का बड़ा फासला दर्ज किया गया है।
प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, लोहरदगा विधानसभा क्षेत्र 98.85 प्रतिशत विसंगतियों का निपटारा करके राज्य में शीर्ष स्थान पर रहा है। इसके विपरीत, राजधानी राँची की प्रदर्शन दर सबसे खराब रही, जहाँ केवल 13.54 प्रतिशत मामलों का ही निष्पादन हो सका है। राँची में दर्ज कुल 49,740 मामलों में से केवल 6,735 मामलों को ही निपटाया जा सका है, जबकि 43,005 मामले अभी भी लंबित पड़े हैं। पाकुड़ (13.76 प्रतिशत), डाल्टनगंज (18.05 प्रतिशत), गोड्डा (18.12 प्रतिशत) और भवनाथपुर (18.40 प्रतिशत) भी सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले क्षेत्रों में शामिल हैं। दूसरी ओर, चक्रधरपुर (98.71 प्रतिशत), जगन्नाथपुर (96.08 प्रतिशत), मझगांव (95.62 प्रतिशत) और चाईबासा (94.78 प्रतिशत) ने इस प्रक्रिया में उत्कृष्ट सफलता दर्ज की है।
पूरे राज्य में पहचान की गई कुल 45.50 लाख तार्किक विसंगतियों में से अब तक 22.86 लाख (50.25 प्रतिशत) मामलों का निष्पादन किया जा चुका है, जबकि 22.64 लाख मामले अभी भी प्रक्रिया में हैं। वहीं दूसरी तरफ, ‘नो-मैपिंग’ (No-Mapping) श्रेणी के 14.04 लाख मामलों में से केवल 4.48 लाख (31.89 प्रतिशत) का ही निपटारा हो सका है। इस श्रेणी में छतरपुर सबसे निचले (2.13 प्रतिशत) पायदान पर रहा, जबकि चक्रधरपुर (87.56 प्रतिशत) शीर्ष पर रहा।
झारखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के. रवि कुमार ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि राज्य के सभी विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या समान नहीं है, जिसके कारण प्रतिशत में भिन्नता दिखाई दे रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सभी चुनाव पंजीकरण अधिकारी निर्धारित समय सीमा के भीतर पुनरीक्षण कार्य पूरा कर लेंगे। मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 30 नवंबर को किया जाएगा।