चीनी भूवैज्ञानिकों ने जलवायु संबंधी चेतावनी दी
भारी चुनौतियो के बीच काम बढ़ा
अरुणाचल में बांध पर बवाल जारी
ब्रह्मपुत्र में जल प्रवाह और बढ़ेगा
भूपेन गोस्वामी
गुवाहाटी : अरुणाचल प्रदेश में 11,200 मेगावाट की सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना के खिलाफ भड़का जनआक्रोश अब केवल एक स्थानीय आंदोलन नहीं रहा, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थानीय आदिवासियों के वजूद के बीच एक बड़ा राजनीतिक संग्राम बन चुका है। केंद्र और राज्य सरकार जहां इस मेगा-डैम को चीन के जल-हमलों के खिलाफ भारत की सबसे बड़ी ढाल मान रही हैं, वहीं सियांग घाटी में बसे ‘आदि’ समुदाय के लोगों के लिए यह उनकी जमीन, पर्यावरण और पुश्तैनी पहचान पर मंडराता सीधा खतरा है।
तिब्बत में चीन के बनाए जा रहे 60,000 मेगावाट के विशाल मेडोग हाइड्रोपॉवर प्रोजेक्ट के जवाब में भारत ने इस परियोजना को बेहद जरूरी करार दिया है। चीनी शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी में इस सदी के दौरान पानी का बहाव बढ़ सकता है और बाढ़ का खतरा भी अधिक हो सकता है। इसी जगह पर चीन 168 अरब अमेरिकी डॉलर की अनुमानित लागत से दुनिया का सबसे बड़ा बांध बना रहा है। चीनी विज्ञान अकादमी और युन्नान विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने दक्षिण-पूर्वी तिब्बती पठार से पेड़ों के छल्लों की चौड़ाई के आंकड़ों का इस्तेमाल करके, 1325 से 2020 तक इस नदी के बहाव के इतिहास का पुनर्निर्माण किया है।
हांगकांग स्थित साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, 8 अक्तूबर को चाइना साइंस बुलटेन जर्नल में प्रकाशित एक शोध पत्र में टीम ने कहा कि ये परिणाम यारलुंग त्सांगपो (ब्रह्मपुत्र) नदी में जल-जलवायु संबंधी बदलावों का एक दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य प्रदान करते हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि जल-संसाधन विकास और भंडारण बुनियादी ढांचे की योजना बनाते समय सीमा-पार जल जोखिमों का आकलन किया जाना चाहिए। जुलाई में, चीनी भूवैज्ञानिकों ने यह भी चेतावनी दी थी कि प्रस्तावित बांध के ठीक नीचे एक सक्रिय फॉल्ट लाइन मौजूद है, जो परियोजना की संरचनात्मक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।
ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत से निकलती है और दक्षिण की ओर बहते हुए भारत में प्रवेश करती है। अरुणाचल प्रदेश में इसे सियांग के नाम से जाना जाता है। चीन का यह मेगा प्रोजेक्ट दक्षिण-पूर्वी तिब्बत के मेडोग में बनाया जा रहा है, जो भारत के साथ विवादित सीमा के करीब स्थित है। चीन ने भारी इंजीनियरिंग चुनौतियों के बावजूद इस परियोजना को आगे बढ़ाया है, हालांकि चीनी विदेश मंत्रालय का दावा है कि इससे निचले बहाव वाले देशों पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा।
इधर, अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट में प्रस्तावित हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के खिलाफ शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब हिंसक रूप ले चुका है। हालात को बेकाबू होते देख केंद्र सरकार ने रैपिड एक्शन फोर्स की दो कंपनियां तैनात कर दी हैं, जिसके तहत 250 जवानों को विशेष विमान से पासीघाट भेजा गया है।