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समुद्र में दफन दो हजार साल पुरानी सभ्यता मिली

तमिलनाडु समुद्री तट से दो किलोमीटर की दूरी पर खोज

प्राचीन कावेरीपूमपट्टिनम शहर की तलाश

मिट्टी के बरतनों का अवशेष पाये गये हैं

समुद्री कारोबार के उपकरण भी पाये गये

राष्ट्रीय खबर

चेन्नईः तमिलनाडु के आधुनिक तट से महज दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित समुद्र की गहराइयों में एक प्राचीन और खोई हुई दुनिया के अवशेष धीरे-धीरे बाहर आ रहे हैं। पूमपुहर के तट से दूर समुद्र तल की गहन खोजबीन कर रहे पुरातत्वविदों के हाथ एक ऐसी बहुमूल्य पुरातात्विक खोज लगी है, जिसने यह साबित कर दिया है कि यह क्षेत्र सदियों पहले वैश्विक समुद्री व्यापार का एक प्रमुख और जीवंत केंद्र हुआ करता था।

समुद्र की सतह से 10 से 12 मीटर नीचे पानी के भीतर चलाए जा रहे अन्वेषण अभियान के दौरान पुरातत्वविदों को मिट्टी के बर्तनों के कई टुकड़े मिले हैं। इन टुकड़ों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये इतनी लंबी दूरी तय करके यहाँ पहुँचे थे, जिसकी कल्पना करना भी आज के समय में आश्चर्यजनक लगता है। विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं का मानना है कि इन प्राचीन बर्तनों की उत्पत्ति पश्चिम एशिया में हुई थी।

इन अवशेषों में सबसे खास खोज एक टॉरपीडो जार के टुकड़े हैं। इतिहास और पुरातत्व के जानकारों के अनुसार, टॉरपीडो जार एक विशेष प्रकार का परिवहन बर्तन या जार होता था, जिसका उपयोग प्राचीन काल में हिंद महासागर के रास्ते होने वाले लंबे समुद्री व्यापार के दौरान सामानों को सुरक्षित एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिए किया जाता था। इस जार के मिलने से यह स्पष्ट होता है कि प्राचीन तमिलनाडु और पश्चिम एशिया के बीच कारोबारी और सांस्कृतिक रिश्ते कितने गहरे और मजबूत थे।

यह महत्वपूर्ण सफलता पुरातत्वविदों को पानी के नीचे की जाने वाली खोज के तीसरे चरण के दौरान मिली। यह अभियान मौजूदा तटरेखा से लगभग 1.8 से 2.2 किलोमीटर की दूरी पर समुद्र के भीतर चलाया जा रहा था। वैज्ञानिक और इतिहासकार प्राचीन कावेरीपूमपट्टिनम शहर की सुराग तलाशने में जुटे हैं, जिसे आज पूमपुहर के नाम से जाना जाता है। यह शहर प्राचीन काल में महान चोल साम्राज्य का एक बेहद प्रसिद्ध, समृद्ध और व्यस्त बंदरगाह हुआ करता था।

समय के साथ समुद्र के जलस्तर में बदलाव और प्राकृतिक आपदाओं के कारण इस गौरवशाली बंदरगाह के कई हिस्से आज बंगाल की खाड़ी के ठंडे और गहरे पानी के नीचे समा चुके हैं। इन डूबे हुए हिस्सों की तलाश कर रहे पुरातत्वविदों के लिए यह नवीनतम खोज एक ठोस और नया भौतिक सुराग लेकर आई है। इसके माध्यम से इतिहासकार प्राचीन चोल साम्राज्य के व्यापार, वास्तुकला और समुद्री प्रभुत्व के इतिहास को अधिक सटीक रूप से पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रहे हैं। इस प्रकार, समुद्र की गोद में छिपे ये अवशेष हमारे गौरवशाली अतीत के कई अनसुने अध्यायों से पर्दा उठा रहे हैं।