गुजरात सरकार का भ्रष्टाचार के खिलाफ ऑपरेशन गंगाजल
विभागीय कार्यवाही के बाद फैसला
दोनों पर गंभीर किस्म के आरोप थे
एक तो पहले से ही निलंबित था
राष्ट्रीय खबर
अहमदाबादः गुजरात सरकार द्वारा प्रशासनिक अमले में भ्रष्टाचार, अनुशासनहीनता और गंभीर कदाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए शुरू किए गए बहुचर्चित अभियान ऑपरेशन गंगाजल के अंतर्गत एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई को अंजाम दिया गया है। राज्य सरकार ने अपनी इस विशेष मुहिम के तहत नियमों और प्रावधानों का हवाला देते हुए दो वरिष्ठ और विवादित भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारियों—के. राजेश और गौरव दहिया को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया है। सरकार के इस सख्त फैसले से पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
गुजरात सरकार के एक उच्च पदस्थ अधिकारी द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ यह दंडात्मक कार्रवाई उनके संपूर्ण सेवा रिकॉर्ड, प्रशासनिक कार्यशैली और उनके विरुद्ध चल रही विभिन्न गंभीर जांच व अनुशासनात्मक कार्यवाहियों की गहन समीक्षा के बाद की गई है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्ट आचरण और कदाचार को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस कार्रवाई के केंद्र में रहे के. राजेश वर्ष 2011 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। सरकार द्वारा अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आधिकारिक आदेश जारी किए जाने से पहले ही वे लंबे समय से निलंबन (सस्पेंशन) के दौर से गुजर रहे थे। उन पर अपने कार्यकाल के दौरान हथियार (आर्म्स) लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं बरतने और रिश्वत लेने के गंभीर आरोप लगे थे। इसके अलावा, उन पर सरकारी भूमि के अवैध और नियमों के विरुद्ध आवंटन से जुड़े मामलों में भी संलिप्तता के गंभीर आरोप थे, जिसकी जांच एजेंसियों द्वारा गहराई से पड़ताल की जा रही थी।
दूसरी ओर, इस सूची में शामिल गौरव दहिया वर्ष 2010 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। अनिवार्य सेवानिवृत्ति के समय वे गांधीनगर में अतिरिक्त विकास आयुक्त के रूप में अपनी प्रशासनिक सेवाएं दे रहे थे। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, उनके विरुद्ध यह कदम सेवाकाल के दौरान सामने आए कई विवादों, अनुशासनात्मक कार्यवाहियों और गंभीर कदाचार की शिकायतों की जांच के निष्कर्षों के आधार पर उठाया गया है। उनके सेवाकाल के दौरान राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) में उनके महत्वपूर्ण कार्यकाल से जुड़े कामकाज और विवाद भी इस जांच के दायरे में शामिल रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि ऑपरेशन गंगाजल के तहत राज्य सरकार की यह दोहरी कार्रवाई नौकरशाही में यह कड़ा संदेश देने का प्रयास है कि जनता के प्रति जवाबदेह पदों पर बैठे अधिकारियों को उच्च नैतिक मानकों का पालन करना अनिवार्य है। सरकार की इस स्पष्ट नीति का उद्देश्य शासन व्यवस्था से भ्रष्टाचार की जड़ों को समाप्त करना और प्रशासनिक पारदर्शिता को फिर से सर्वोच्च प्राथमिकता देना है।