अन्य नौकरशाहों के बाद अब भाजपा के पूर्व मंत्री भी बोले
कई प्रमुख पदों पर रहे नौकरशाह हैं
भाजपा सरकार में ऊर्जा मंत्री भी रहे
चुनाव आयोग लोकतंत्र के खिलाफ है
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः देश के पूर्व केंद्रीय गृह सचिव और पूर्व मंत्री आरके सिंह ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के संचालन में बड़े पैमाने पर अवैधताओं और मनमाने रवैये का आरोप लगाते हुए देशवासियों और राजनीतिक ताकतों से लोकतंत्र की रक्षा के लिए आगे आने की अपील की है। आरके सिंह का यह बयान देश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि एक वरिष्ठ पूर्व नौकरशाह द्वारा इस तरह के आरोप सीधे संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हैं।
आरके सिंह ने आरोप लगाया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनाव आयोग के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और सामूहिक उत्तरदायित्व की परंपरा को दरकिनार करते हुए कई महत्वपूर्ण निर्णय एकतरफा ढंग से लिए। उनका कहना है कि एसआईआर से जुड़े फैसलों में अन्य चुनाव आयुक्तों की स्पष्ट सहमति या बहुमत का सम्मान नहीं किया गया, जो कि कानून और आयोग के स्थापित नियमों के खिलाफ है। इसके अलावा, उन्होंने मतदाता सूचियों से बड़े पैमाने पर पात्र नागरिकों के नाम हटाए जाने की प्रक्रिया को भी पूरी तरह से अवैधानिक और अनुचित करार दिया है। उनके अनुसार, इस तरह के कदम सीधे तौर पर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और स्वतंत्र चुनावों की शुचिता पर करारा प्रहार करते हैं।
अपने इस कड़े बयान के जरिए पूर्व गृह सचिव ने देश के सभी जिम्मेदार नागरिकों, राजनीतिक दलों और संस्थाओं से आग्रह किया है कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर भारतीय लोकतंत्र और उसकी संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता को बचाने के लिए एकजुट हों। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते चुनावी प्रक्रिया में हो रही इन कथित अनियमितताओं और मनमाने फैसलों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो यह देश की लोकतांत्रिक जड़ों को कमजोर कर सकता है। इस बयान के बाद चुनाव आयोग की कार्यशैली को लेकर जारी विवाद और अधिक गहरा गया है तथा इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया है।