ओडिशा में एमएमडीआर को लेकर सत्ता पक्ष पर दोतरफा हमला
इंडिया गठबंधन का जोरदार प्रदर्शन
राज्य के साथ विश्वासघात का आरोप
ओडिशा बंद और नाकेबंदी का भी एलान
प्रसन्न मोहंति
भुवनेश्वरः ओडिशा में केंद्र सरकार के खान एवं खनिज विकास एवं विनियमन संशोधन अधिनियम-2026 को लेकर राजनीतिक घमासान अपने चरम पर पहुंच गया है। राज्य की सत्ताधारी भाजपा के खिलाफ अब पूरा विपक्ष लामबंद हो चुका है। बीजू जनता दल (बीजद) के विरोध प्रदर्शन के ठीक बाद मंगलवार को भुवनेश्वर में इंडिया गठबंधन के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के आवास के नजदीक जोरदार प्रदर्शन किया। हालांकि पूर्व निर्धारित योजना के तहत विधानसभा का घेराव किया जाना था, लेकिन मानसून सत्र समय से पहले 28 सितंबर को ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो जाने के कारण प्रदर्शन का स्थल बदलकर मुख्यमंत्री आवास के पास कर दिया गया।
इस उग्र प्रदर्शन की अगुवाई प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने की। उनके साथ कांग्रेस विधायक दल के नेता रामचंद्र कदम, वरिष्ठ नेता जयदेव जेन के अलावा सीपीआई, सीपीआई (एम), सीपीआई (एमएल) लिबरेशन, फॉरवर्ड ब्लॉक, एनसीपी, समाजवादी पार्टी और आरजेडी के तमाम दिग्गज नेता कंधे से कंधा मिलाकर खड़े नजर आए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार पर ओडिशा के अधिकारों को कुचलने का सीधा आरोप लगाया।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भक्त चरण दास ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ओडिशा की खनिज संपदा के साथ गहरा विश्वासघात किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि नया एमएमडीआर कानून राज्य के हितों के पूरी तरह खिलाफ है, जो ओडिशा के खनिज संसाधनों पर उसके पारंपरिक अधिकारों को छीनता है और देश के संघीय ढांचे पर सीधा प्रहार करता है। बीजद और इंडिया ब्लॉक का दावा है कि इस नए कानून की वजह से ओडिशा को सालाना लगभग बारह हजार करोड़ रुपये के भारी-भरकम राजस्व का नुकसान उठाना पड़ेगा, जबकि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों से पूरे देश का विकास किया जा रहा है।
सरकार को आड़े हाथों लेते हुए इंडिया ब्लॉक ने इस लड़ाई को गांव-गांव तक पहुंचाने का शंखनाद कर दिया है। आंदोलन की शुरुआत ओडिशा की खनिज राजधानी कहे जाने वाले केंझर (केन्दुझर) जिले से की जाएगी। इसके साथ ही गठबंधन ने आगामी 8 अक्टूबर को पूरे राज्य में चक्का जाम और ओडिशा बंद का आक्रामक ऐलान किया है। इस बंद के समर्थन में खनिज खदानों से परिवहन रोकने के लिए सात दिनों की पूर्ण आर्थिक नाकेबंदी करने की भी चेतावनी दी गई है।
इसके अलावा, विपक्षी दलों ने अन्य ज्वलंत मुद्दों पर भी सरकार को घेरते हुए स्कूली पाठ्यपुस्तकों में गंभीर त्रुटियों के मामले में शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे की मांग उठाई है। साथ ही, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित धांधलियों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को भी पुरजोर तरीके से उठाया गया है। बीजद के बाद अब इंडिया ब्लॉक के मैदान में उतरने से यह पूरा विवाद राज्य की सियासत का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है।