आंध्रप्रदेश में एसआईआर के समर्थन के बाद भी उल्टा बयान
राज्य में एसआईआर का समर्थन है
जो सवाल उठे हैं, वे महत्वपूर्ण हैं
जनता का विश्वास बहाल रखा जाए
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के नेता देवरायलू ने एक अलग रुख अपनाते हुए आंध्र प्रदेश में एसआईआर अभियान का बचाव किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि चुनाव आयोग को लेकर उठाए गए सवालों पर जवाब दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, यह अभियान (एसआईआर) सफल रहा है।
यहां तक कि विपक्ष भी आंध्र प्रदेश में इस प्रक्रिया को लेकर अपनी चिंताओं को साबित करने में सक्षम नहीं रहा है। इसके साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग की संवैधानिक भूमिका से जुड़ी जिम्मेदारी पर भी जोर दिया। देवरायलू ने कहा, इसलिए, जब भी किसी के द्वारा सवाल उठाए जाते हैं, तो उचित स्पष्टता प्रदान करना और पारदर्शिता बनाए रखने से केवल संस्था में जनता का विश्वास मजबूत होगा। इससे पहले आरएलएम के उपेंद्र कुशवाह का कहना है कि एसआईआर विवाद ने भ्रम पैदा किया है राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाह ने भी चुनाव आयोग से तत्काल स्पष्टता की मांग की है।
कुशवाह ने कहा, एसआईआर को लेकर हुए विवाद ने जनता के बीच काफी असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है। इस मामले का समाधान किया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, चुनाव आयोग को इस भ्रम को दूर करने के लिए वास्तविक स्थिति पर तुरंत एक स्पष्टीकरण जारी करना चाहिए।
चुनाव आयोग ने उन सुझावों को खारिज कर दिया है जिनमें यह कहा गया था कि सामने आई आपत्तियां उसकी निर्णय लेने की प्रक्रिया में किसी तरह के टूटने का संकेत देती हैं। रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए आयोग ने कहा कि अलग-अलग विचार और टिप्पणियां संस्थागत चर्चाओं का एक सामान्य हिस्सा हैं। आयोग ने कहा कि चुनाव आयुक्तों द्वारा दिए गए सुझाव चुनावी प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने के प्रयासों का हिस्सा थे और यह भी स्पष्ट किया कि पिछले एक साल में लिए गए अंतिम निर्णय पूरी तरह सर्वसम्मत थे। तीन सदस्यीय आयोग में वर्तमान में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी शामिल हैं। इस विवाद के कारण विपक्षी दलों द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और एसआईआर अभियान को रोकने की मांग भी उठाई गई है।
लोजपा (राम विलास) प्रमुख चिराग पासवान ने विपक्षी आरोपों का समर्थन करने और चुनाव आयोग से उन सवालों का जवाब मांगने के बीच अंतर स्पष्ट किया जो अब सार्वजनिक डोमेन में आ चुके हैं। पासवान ने कहा, यदि लोग चुनावी प्रणाली से अपना विश्वास खोने लगते हैं, तो यह लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं होगा और इसलिए, मुझे लगता है कि चुनाव आयोग को अधिक मजबूती के साथ अपना स्पष्टीकरण सामने रखना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, उन्हें इस बात पर प्रतिक्रिया देने की जरूरत नहीं है कि राहुल गांधी और उनके सहयोगी क्या कह रहे हैं, लेकिन उन्हें लोगों के मन में पैदा हुए संदेह को जरूर दूर करना चाहिए।
लोजपा प्रमुख ने यह भी साफ किया कि वह केवल इसलिए चुनाव पैनल का बचाव नहीं कर रहे हैं क्योंकि उनकी पार्टी सरकार का हिस्सा है, और न ही वह विपक्ष के आरोपों का समर्थन कर रहे हैं।