स्क्वाड्रन लीडर सक्सेना को वापस मिलेगी मौकरी
सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया
एएफटी के खिलाफ अपील स्वीकार हुआ
उसके पति वायुसेना में रहते शहीद हुए
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्लीः भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय वायु सेना को निर्देश दिया है कि वह पूर्व शॉर्ट सर्विस कमीशन प्राप्त अधिकारी और युद्ध विधवा, प्रियंका सक्सेना को लगभग 13 साल बाद फिर से स्क्वाड्रन लीडर के रूप में सेवा में वापस ले। अदालत ने एक विशिष्ट तथ्यों वाले मामले में पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का उपयोग किया।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जयमल्य बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी), प्रिंसिपल बेंच, नई दिल्ली के 18 मई 2023 और 2 जुलाई 2024 के आदेशों के खिलाफ सक्सेना की अपील को स्वीकार कर लिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह राहत केवल उनकी व्यक्तिगत परिस्थितियों तक सीमित है और इसे एक मिसाल (प्रेसीडेंट) नहीं माना जाएगा।
प्रियंका सक्सेना को 2003 में लॉजिस्टिक्स शाखा में शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी के रूप में भारतीय वायु सेना में कमीशन किया गया था। उन्होंने अपने दस साल का कार्यकाल पूरा किया और दिसंबर 2013 में सेवामुक्त हो गईं, क्योंकि उन्होंने पारिवारिक प्रतिबद्धताओं का हवाला देते हुए विस्तार या स्थायी कमीशन न लेने का विकल्प चुना था। उस समय उन्हें अपने पति (जो एक फाइटर पायलट थे) का समर्थन करने और अपने बच्चे की देखभाल करने की आवश्यकता थी।
उनके पति, श्रीनगर की 51 स्क्वाड्रन के विंग कमांडर हर्षित सिन्हा, 24 दिसंबर 2021 को जैसलमेर एयरफील्ड के पास मिग-21 बाइसन विमान दुर्घटना में शहीद हो गए थे। इस दंपति की दो नाबालिग बेटियां हैं। पति की मृत्यु के बाद, सक्सेना ने अपने पिछले एक दशक के सेवाकाल के आधार पर पुनर्नियुक्ति के लिए आवेदन किया।
वायु सेना ने इस अनुरोध को इस आधार पर खारिज कर दिया था कि उन्होंने युद्ध विधवाओं के प्रवेश के लिए लागू नीति के तहत 35 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा पार कर ली है। सशस्त्र बल न्यायाधिकरण ने सरकार को यह जांच करने का निर्देश दिया था कि क्या उन महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारियों के लिए कोई नीति बनाई जानी चाहिए जो सेवा छोड़ देती हैं और बाद में सेवारत कर्मियों की विधवा बन जाती हैं। हालांकि, इसने सक्सेना को कोई व्यक्तिगत प्रभावी राहत नहीं दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने अब उन न्यायाधिकरण आदेशों को रद्द कर दिया है।
पीठ ने टिप्पणी की कि युद्ध विधवाओं के लिए मौजूदा नीति, सीटों के आरक्षण जैसी रियायतों के बावजूद, उन महिला अधिकारियों को कवर नहीं करती थी जिन्होंने खुद सशस्त्र बलों में सेवा की थी और बाद में विधवा हो गईं। अदालत ने माना कि सक्सेना दो स्वतंत्र आधारों पर पात्र थीं: एक पूर्व वायु सेना अधिकारी के रूप में और दूसरा वायु सेना अधिकारी की विधवा के रूप में। सुनवाई के दौरान, अदालत ने कहा कि राष्ट्र में उनके दिवंगत पति के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।