म्यांमार की आतंकी साजिश से जुड़े विदेशियों की चुपचाप रिहाई
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सभी लोग संदिग्ध तरीके से पकड़े गये
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अमेरिकी नागरिक वहां का पूर्व सैनिक
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आतंकी गुटों को प्रशिक्षण देने का आरोप
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: म्यांमार स्थित जातीय सशस्त्र समूहों से जुड़ी कथित आतंकी साजिश के मामले में मार्च में राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा गिरफ्तार किए गए अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक की रिहाई ने एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस ने उसकी रिहाई की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि इस परिणाम पर अमेरिकी कूटनीतिक दबाव का असर था।
कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, हमारे कमजोर प्रधानमंत्री ने यह फिर से कर दिखाया है। प्रधानमंत्री भारत के चुनावों, संस्थानों और हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करने में विफल रहे हैं। वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को एनआईए ने 13 मार्च को गिरफ्तार किया था।
एजेंसी के आरोपों के अनुसार, आरोपियों ने भारत में प्रवेश किया था और म्यांमार में प्रवेश करने से पहले पूर्वोत्तर के प्रतिबंधित क्षेत्रों की यात्रा की थी, जहां वे कथित तौर पर जातीय सशस्त्र संगठनों के संपर्क में आए और ड्रोन-युद्ध प्रशिक्षण में शामिल थे। एनआईए ने शुरुआत में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया था।
एजेंसी के मार्च के अदालत में दिए गए बयानों में आरोप लगाया गया था कि आरोपी भारत विरोधी विद्रोही समूहों का समर्थन करते थे। एनआईए ने बाद में दिल्ली की एक अदालत को बताया कि सातों विदेशी नागरिक म्यांमार में एक नागरिक विमान पर हुए ड्रोन हमले से कथित तौर पर जुड़े हुए थे, हालांकि जांच अभी जारी थी। इस मामले में 8 सितंबर को नया मोड़ आया, जब एनआईए ने चार्जशीट में यूएपीए के प्रावधानों को शामिल किए बिना, आव्रजन और विदेशी अधिनियम, 2025 की धाराओं 21 और 23 के तहत सातों लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।