तमिलनाडु की नाराजगी के राष्ट्रीय स्तर पर असर दिख रहा है
तीसरे मोर्चे की तैयारी में जुटे हैं सभी
बैठक का मुद्दा सार्वजनिक नहीं किया
कांग्रेस से नाराज चल रही डीएमके
राष्ट्रीय खबर
कोलकाताः डीएमके और कांग्रेस के बीच बढ़ते तनाव तथा विपक्षी इंडिया गठबंधन के भीतर जारी खींचतान के बीच, द्रमुक की वरिष्ठ नेता कनिमोझी ने गुरुवार को कोलकाता में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की। तृणमूल कांग्रेस के एक नेता के अनुसार, लोकसभा सांसद कनिमोझी ने दक्षिण कोलकाता के कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के आवास पर उनसे एक बंद कमरे में बैठक की। हालांकि इस बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसका आधिकारिक तौर पर खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन इसके राजनीतिक मायने बहुत गहरे निकाले जा रहे हैं।
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब कुछ दिन पहले ही कनिमोझी ने मुंबई में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और दिल्ली में राकांपा प्रमुख शरद पवार से भी गहन चर्चा की थी। विपक्षी दलों के बीच इस प्रकार के मेल-मिलाप ने राजनीतिक गलियारों का ध्यान अपनी ओर खींचा है, खासकर तब जब डीएमके और कांग्रेस के बीच रिश्तों में खटास चल रही है और विपक्षी गठबंधन इंडिया के कई क्षेत्रीय घटक दलों के बीच आपसी मतभेद खुलकर सामने आ रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर टीएमसी और कांग्रेस दोनों ही इंडिया ब्लॉक का हिस्सा हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में उनके संबंध हमेशा से विवादित और तनावपूर्ण रहे हैं। हाल ही में दोनों दलों के बीच 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव को लेकर भी तीखी नोकझोंक देखने को मिली है।
राज्य कांग्रेस ने दावा किया था कि टीएमसी ने उसके केंद्रीय नेतृत्व से संपर्क करके नंदीग्राम सीट कांग्रेस के लिए छोड़ने का प्रस्ताव रखा था, जिसे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने सिरे से खारिज कर दिया। इसके अलावा, तमिलनाडु में विधानसभा चुनावों के बाद डीएमके और कांग्रेस के रिश्तों में भी काफी तनाव आ गया था।
वर्तमान स्थिति यह है कि कांग्रेस अब अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाले टीवीके के सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा है, जबकि डीएमके विपक्ष में बैठी है। दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल में भाजपा के सत्ता में आने और 15 साल के टीएमसी शासन के अंत के बाद से तृणमूल कांग्रेस भी भारी राजनीतिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। पार्टी को विधानसभा के साथ-साथ अपने संसदीय खेमे में भी असंतोष का सामना करना पड़ रहा है, जिससे ममता बनर्जी के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं।
इससे पहले डीएमके ने जून में इंडिया ब्लॉक की एक बैठक से भी दूरी बना ली थी और तब से पार्टी ने कांग्रेस के प्रति अधिक आक्रामक रुख अपना रखा है। इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में कनिमोझी की इन मुलाकातों ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले ढांचे से बाहर के दलों के बीच आपसी तालमेल को मजबूत करने के प्रयासों को लेकर तमाम अटकलों को हवा दे दी है, हालांकि इन बैठकों का उद्देश्य कोई नया राजनीतिक मोर्चा बनाना है या नहीं, इस बारे में कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिला है।