बीजेडी ने दी आर्थिक नाकेबंदी की चेतावनी
भाजपा का बयान पर पलटवार
राज्य के घाटा वाला फैसला है
विधानसभा में भी होगा टकराव
प्रसन्न महांति
भुवनेश्वरः केंद्र सरकार के खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम (एमएमडीआर) को लेकर ओडिशा की सियासत में उबाल आ गया है। मुख्य विपक्षी दल बीजद ने इस संशोधन को ओडिशा के हितों पर हमला बताते हुए आर्थिक नाकेबंदी की चेतावनी दी है, वहीं सत्तारूढ़ भाजपा ने इसे विपक्ष का दुष्प्रचार करार दिया है।
केंद्र सरकार ने एमएमडीआर एक्ट में संशोधन कर खनिजों की नीलामी और खनन के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। नए प्रावधान के तहत क्रिटिकल और डीप-सीटेड खनिजों जैसे लिथियम, सोना और रेयर अर्थ की नीलामी का अधिकार सीधे केंद्र सरकार के पास चला गया है। ओडिशा देश का सबसे बड़ा खनिज उत्पादक राज्य है, इसलिए इस कानून का सबसे ज्यादा असर यहीं पर पड़ेगा।
बीजद के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अरुण कुमार साहू ने सोमवार को शंख भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र और राज्य की मोहन सरकार पर बड़ा हमला बोला। साहू ने कहा, एमएमडीआर संशोधन ओडिशा के संघीय अधिकारों पर हमला है। इससे ओडिशा को हर साल हजारों करोड़ के राजस्व का नुकसान होगा और डीएमएफ से होने वाले आदिवासी इलाकों के विकास पर ब्रेक लग जाएगा।
यह एक तरह का आर्थिक ब्लॉकेड है। अरुण साहू ने एलान किया कि बीजद के लिए एमएमडीआर ही आगामी विधानसभा सत्र का सबसे बड़ा मुद्दा होगा। ओडिशा विधानसभा का मानसून सत्र 22 सितंबर से शुरू होकर 3 अक्टूबर तक चलेगा।इस सत्र में कुल 9 कार्य दिवस होंगे। यह सत्र हंगामेदार रहने वाला है क्योंकि विपक्ष के पास एमएमडीआर से लेकर कई मुद्दे हैं ।
बीजद और कांग्रेस दोनों ने आरोप लगाया है कि यह संशोधन ओडिशा के हितों को गंभीर नुकसान पहुंचाएगा और राज्य के खनन राजस्व को प्रभावित करेगा। विपक्ष ने पहले इस पर विशेष सत्र बुलाने की मांग भी की थी। इसके अलावा पाठ्यपुस्तकों में गलतियां, बाढ़ प्रबंधन में लापरवाही और कानून-व्यवस्था के मुद्दे भी सत्र में छाए रहेंगे। बीजद ने साफ कहा है कि वह इस लड़ाई को गांव से लेकर विधानसभा तक लड़ेगी।
वहीं उद्योग मंत्री संपद चन्द स्वाई ने कहा कि बीजद 24 साल की खनिज लूट पर पर्दा डालने के लिए भ्रम फैला रही है। नए कानून से पारदर्शिता आएगी और ओडिशा को ज्यादा निवेश मिलेगा।