एनसीएलटी के बाद अब दूसरा मामला भी उलटा पड़ा
कर्ज मामले में गलतबयानी का आरोप
कर्ज देने के बाद डिफाल्ट हो गये दोनों
संपत्ति खरीद के लिए लिया था कर्ज
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने मीडिया कारोबारी सुभाष चंद्रा के खिलाफ एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से ऋण प्राप्त करने के लिए अपनी कुल संपत्ति (नेट वर्थ) को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है। अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि यह लोन आगे चलकर डिफॉल्ट हो गया, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र के इस ऋणदाता को 1,322 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। कंपनी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि चंद्रा ने फर्जी नेट वर्थ प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए, जिनका उपयोग कुल 980 करोड़ रुपये के दो ऋणों की स्वीकृति और वितरण के लिए किया गया था।
प्राथमिकी के अनुसार, पहली सुविधा वसंत सागर प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड (सह-उधारकर्ता पैन इंडिया इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स) को दी गई 500 करोड़ रुपये की थी, जिसके लिए चंद्रा ने 28 मार्च 2018 को गारंटी दी थी। दूसरी सुविधा डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को दी गई 480 करोड़ रुपये की रेंटल डिस्काउंटिंग सुविधा थी, जिसके लिए भी चंद्रा ने गारंटी दी थी। एलआईसीएचएफएल के अनुसार, चंद्रा द्वारा प्रस्तुत डीआईएम एंड कंपनी के प्रमाणपत्र में उनकी संपत्ति लगभग 59,000 करोड़ रुपये और एमपीजे एंड कंपनी के प्रमाणपत्र में 40,562 करोड़ रुपये दर्शाई गई थी।
बाद में दोनों ऋण खाते डिफॉल्ट हो गए। इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) की कार्यवाही के दौरान, चंद्रा ने एलआईसीएचएफएल को सौंपे गए प्रमाणपत्रों में बताई गई नेट वर्थ से इनकार किया और 2024 में अपनी संपत्ति केवल 31.79 करोड़ रुपये तथा 2017-18 में 40,000 करोड़ रुपये से अधिक न होने का दावा किया। सीबीआई ने आरोप लगाया कि चंद्रा ने उधारकर्ता कंपनियों के साथ मिलकर एलआईसीएचएफएल के साथ धोखाधड़ी की और सार्वजनिक धन का गबन किया।