अस्पताल के आठ अधिकारी निलंबित किये गये
खुद पीएम कार्यालय ने दिया निर्देश
वहां के कार्यकारी निदेशक भी दंडित
पीड़ित परिवारों को पचास लाख मुआवजा
इस्लामाबादः पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद स्थित सरकारी अस्पताल के नवजात शिशु वार्ड में भीषण आग लगने से 14 शिशुओं की मौत हो गई। इस दुखद घटना के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने आठ वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है और उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरू करने के निर्देश जारी किए हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा शनिवार को जारी बयान के अनुसार, इस्लामाबाद के पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में हुए इस हादसे की शुरुआती जांच रिपोर्ट मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है।
यह दुर्घटना बुधवार सुबह 7 बजे से ठीक पहले मदर एंड चाइल्ड हेल्थकेयर सेंटर की नर्सरी में हुई। आग इतनी तेजी से फैली कि हर इनक्यूबेटर पर लगे ऑक्सीजन आउटलेट्स के जरिए यह पूरे वार्ड में विकराल रूप ले बैठी। तीसरी मंजिल पर स्थित इस नर्सरी में कुल 15 नवजात बच्चे भर्ती थे, जिनमें से अस्पताल कर्मचारी केवल एक बच्चे को ही सुरक्षित बाहर निकाल सके। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसे पूरे देश को झकझोर देने वाली राष्ट्रीय त्रासदी बताते हुए दोषियों को सख्त से सख्त सजा देने का वादा किया है।
निलंबित अधिकारियों में पीआईएमएस के कार्यकारी निदेशक, दो संयुक्त कार्यकारी निदेशक, नवजात विभाग के प्रमुख, दो वरिष्ठ डॉक्टर, एक सुरक्षा अधिकारी और कैपिटल डेवलपमेंट अथॉरिटी के आपातकालीन सेवा प्रमुख शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, अस्पताल की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार निजी कंपनी और उसके अधिकारियों पर भी कार्रवाई को मंजूरी दी गई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को अस्पताल का अंतरिम निदेशक नियुक्त किया गया है।
जांच समिति की अंतरिम रिपोर्ट में अस्पताल प्रबंधन की गंभीर लापरवाहियों का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल मं् अग्नि सुरक्षा का कोई व्यावहारिक इंतजाम नहीं था और 13 मानक संचालन प्रक्रियाओं में से केवल दो ही आपातकालीन स्थितियों से संबंधित थीं। आग लगने के समय वार्ड में कोई पर्यवेक्षक (सुपरवाइजरी स्टाफ) मौजूद नहीं था, केवल दो नर्सें, एक महिला सुरक्षा गार्ड और एक हाउस ऑफिसर ही वहां तैनात थे।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि आग लगने के छह मिनट बाद आपातकालीन सेवाओं को फोन किया गया और दमकल की गाड़ियां सूचना मिलने के 15 मिनट बाद मौके पर पहुंचीं। हैरानी की बात यह है कि ठीक एक महीने पहले भी अस्पताल के नर्सिंग हॉस्टल में आग लगी थी, लेकिन उससे कोई सबक नहीं लिया गया। इस भयानक त्रासदी के बीच नर्स रज़िया नोरिन ने अपनी जान जोखिम में डालकर एक बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला। प्रधानमंत्री ने उनकी बहादुरी के लिए उन्हें सितारा-ए-खिदमत नागरिक सम्मान और 10 लाख रुपये का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है। वहीं, स्वास्थ्य मंत्री मुस्तफा कमाल ने देश की स्वास्थ्य प्रणाली की लाचारी पर चिंता जताते हुए संसदीय जांच का समर्थन किया है, और सरकार ने प्रत्येक पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये के मुआवजे का ऐलान किया है।