सड़कों पर तैरते वाहन और जान बचाकर भागते लोग
काठमांडूः नेपाल के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में एक सप्ताह की तबाही के बाद शुक्रवार को बचाव कार्य फिर से शुरू कर दिए गए। नेपाली सेना के प्रवक्ता ने बताया कि बैरियर झील से पानी ओवरफ्लो होने के कारण अभियानों को अस्थायी रूप से रोक दिया गया था। इससे पहले शुक्रवार को सेना के एक अधिकारी ने जानकारी दी थी कि बाढ़ प्रभावित इलाके की एक झील के उफान पर आने की खबरों के बाद बचाव कार्यों को 90 मिनट के लिए पूरी तरह रोक दिया गया था। बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित रसुवा जिले में भी हेलीकॉप्टर रेस्क्यू रोक दिया गया। प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, जान बचाने के लिए स्थानीय लोग ऊंची पहाड़ियों की तरफ भागते दिखे। जारी वीडियो फुटेज में एक स्कूल बस भी नजर आई, जिसमें बच्चे इस अफरा-तफरी के बीच फंसे हुए थे।
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कुछ ही मिनटों में, चहल-पहल से भरा यह बाजार पूरी तरह तबाही के मंजर में बदल गया। त्रिशूली के कई इलाकों में भयानक विनाश देखने को मिला है। जहाँ कल तक मकान, इमारतें और पुल हुआ करते थे, वहाँ अब सिर्फ चट्टानें, गाढ़ा कीचड़ और उफनती नदी ही नजर आ रही है।
रेड क्रॉस के मुताबिक, नुवाकोट सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में से एक है। यहाँ पूरे के पूरे गाँव नष्ट हो चुके हैं और सड़कें व पुल टूटने से कई समुदायों का संपर्क बाकी दुनिया से कट गया है। सबसे गंभीर इलाकों में बचाव दल भारी मात्रा में जमा कीचड़ और मलबे को हटाने के काम में जुटे हैं। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, लापता लोगों के जीवित मिलने की उम्मीदें धुंधली पड़ती जा रही हैं।
गुरुवार को बाढ़ प्रभावित नुवाकोट का दौरा करने वाले नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने कहा कि स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। उन्होंने कहा, राज्य की सभी एजेंसियां अपनी पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। हमारी पहली प्राथमिकता हर नागरिक की जान बचाना, लापता लोगों की तलाश व रेस्क्यू, घायलों का इलाज और प्रभावित परिवारों तक तुरंत राहत पहुंचाना है। शुक्रवार तक इस भीषण बाढ़ और तबाही के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 469 हो चुकी है, जबकि लगभग 1,500 लोग अभी भी लापता हैं, जिनमें 290 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं।