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महाराष्ट्र के बाद बिहार में राहुल का भय साफ दिखा

एक बयान के बाद पूर्व फैसला बदला गया

अब एक ही चरण में परीक्षा होगी

शिक्षक भर्ती से जुड़ी परीक्षा पर बवाल

पटना में पुलिस से जोरदार झड़प हुई थी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की जाने वाली शिक्षक भर्ती परीक्षा को लेकर बिहार सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग को स्वीकार करते हुए घोषणा की है कि अगले माह होने वाली टीआरई-4 परीक्षा अब दो चरणों (प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा) के बजाय केवल एक ही चरण में आयोजित की जाएगी।

इससे ठीक पहले नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि बिहार सरकार लाठी के जोर पर आंदोलन को दबा रही है जबकि छात्रों से सीधी वार्ता की जरूरत है। उन्होंने सरकार पर पुलिस के पीछे छिपने की भी बात कही थी।

यह निर्णय पटना में अभ्यर्थियों द्वारा पिछले तीन हफ्तों से किए जा रहे उग्र प्रदर्शनों और विरोध के बाद आया है। अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया में दो चरणों के प्रस्ताव का विरोध कर रहे थे और पारदर्शी तरीके से एक ही चरण में परीक्षा संपन्न कराने की मांग कर रहे थे। राजधानी पटना में प्रदर्शनकारी छात्रों और पुलिस के बीच तीखी झड़प देखने को मिली थी, जब अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च करने का प्रयास किया था। विवाद तब और बढ़ गया था जब विरोध प्रदर्शन के दौरान एक अधिकारी की टिप्पणी से छात्र आक्रोशित हो गए थे।

स्थिति को नियंत्रित करने और छात्रों के असंतोष को दूर करने के लिए, मुख्यमंत्री ने छात्र प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि सरकार शुरू से ही अभ्यर्थियों की मांगों के प्रति गंभीर रही है। सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि टीआरई-4 परीक्षा केवल एक चरण में ओएमआर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्नों के जरिए ही आयोजित की जाएगी।

इसके साथ ही, राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं में सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पटना उच्च न्यायालय के एक वर्तमान न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है। यह समिति छात्रों की शिकायतों को सुनेगी और परीक्षा प्रणाली में बदलाव के सुझाव देगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्रों के सवालों और समस्याओं के त्वरित निवारण के लिए विद्यार्थी सहायता पोर्टल और विद्यार्थी सहायता शिविर शुरू किए गए हैं। सरकार के इस निर्णय का अभ्यर्थियों और छात्र संगठनों ने स्वागत करते हुए इसे एक ऐतिहासिक जीत बताया है।