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सरकार की फ्री कोचिंग योजना प्रारंभ में भी अटक गई

सिर्फ 26 फीसद छात्रों ने लिया दाखिला

बार बार बजट घटाना पड़ा

तब भी सीटें खाली रह गयी

आठ लाख आय मुख्य बाधा

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को मुफ्त कोचिंग प्रदान करने की योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने में विफल रही है। पिछले तीन वर्षों में निर्धारित 10,500 उम्मीदवारों के लक्ष्य के मुकाबले केंद्र सरकार केवल 2,790 छात्रों (26 फीसद) का ही दाखिला कर सकी।

10 अगस्त को संसद में पेश सामाजिक न्याय और अधिकारिता संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि मंत्रालय द्वारा प्रतिवर्ष 3,500 छात्रों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। यह रिपोर्ट ऐसे समय में मुफ्त कोचिंग की निराशाजनक तस्वीर पेश करती है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीट-यूजी पेपर लीक के खिलाफ जेन-जी के विरोध प्रदर्शनों के बाद स्वतंत्रता दिवस के भाषण में सभी छात्रों के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग शुरू करने की घोषणा की थी। हालांकि, इस योजना का रोडमैप अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है।

रिपोर्ट के अनुसार, 2023-24 में केवल 223 छात्रों, 2024-25 में 2,136 छात्रों और 2025-26 में केवल 431 छात्रों को मुफ्त कोचिंग दी गई। बजट के मोर्चे पर भी भारी कटौती और कम खर्च देखा गया। 2023-24 में 47 करोड़ के बजट अनुमान के मुकाबले केवल 7.76 करोड़ खर्च हुए। इसके बाद 2024-25 में बजट घटाकर 35 करोड़ किया गया जिसमें 17.68 करोड़ खर्च हुए। 2025-26 में बजट और घटाकर 20 करोड़ कर दिया गया, जबकि मंत्रालय के अनुसार वास्तविक खर्च 9.86 करोड़ रहा।

यह योजना यूपीएससी, एसएससी, रेलवे, आईआईटी-जेईई, नीट, कैट, क्लैट, एनडीए और सीडीएस जैसी परीक्षाओं के लिए अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग  तथा पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन के लाभार्थियों को कवर करती है। वर्ष 2026-27 के लिए मंत्रालय ने 7,000 उम्मीदवारों का लक्ष्य रखा है, जिस पर समिति ने सवाल उठाया है कि जब पिछला लक्ष्य ही पूरा नहीं हुआ, तो इसे दोगुना क्यों किया गया।

समिति ने चिन्हित किया कि पारिवारिक वार्षिक आय सीमा 8 लाख होना इस योजना की राह में मुख्य बाधा है। समिति ने इस आय सीमा को फिर से बढ़ाने की सिफारिश की थी ताकि अधिक छात्र इसका लाभ उठा सकें, लेकिन मंत्रालय ने कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी। समिति का मानना है कि अनुसूचित जाति/ओबीसी बच्चों को पीएम केयर्स लाभार्थियों के समान माना जाना चाहिए, जिन पर कोई आय सीमा लागू नहीं है। वर्तमान में केवल 14 केंद्रीय विश्वविद्यालय ही कोचिंग दे रहे हैं। शिलॉन्ग, केरल, वर्धा और आंध्र प्रदेश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों से फंडिंग के प्रस्ताव ही प्राप्त नहीं हुए। मंत्रालय ने कहा है कि दायरा बढ़ाने के लिए राज्य विश्वविद्यालयों, डॉ. आंबेडकर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और छात्र-केंद्रित मॉडल को शामिल करने का प्रस्ताव है।