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सीबीआई की विशेष अदालत में अभियुक्तों को दस साल कैद

करीब बीस वर्षों के बाद धोखाधड़ी के मामले में अदालती फैसला

भारतीय स्टेट बैंक में हुआ था अपराध

अपराधियों पर आर्थिक दंड भी लगाया है

तेरह साल बाद अदालत का फैसला आया

राष्ट्रीय खबर

चेन्नईः चेन्नई की एक विशेष सीबीआई अदालत ने बैंकिंग क्षेत्र में हुई एक बड़ी धोखाधड़ी के मामले में ऐतिहासिक और कठोर फैसला सुनाते हुए आठ दोषियों को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला वर्ष 2007-08 के दौरान भारतीय स्टेट बैंक की चेंगम शाखा से जुड़े लगभग 1.97 करोड़ रुपये के घोटाले का है, जिसने बैंकिंग प्रणाली की सुरक्षा और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए सीबीआई ने बताया कि इस षड्यंत्र में दो तत्कालीन सरकारी अधिकारी और छह निजी व्यक्ति शामिल थे। दोषी ठहराए गए लोक सेवकों में एसबीआई की चेंगम शाखा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक एन. गोपालकृष्णन और तत्कालीन ग्रामीण विपणन एवं वसूली अधिकारी पी. बालमुरली शामिल हैं। इनके साथ ही अपराध में संलिप्त छह अन्य दोषियों में आर. वेंकटरमन, एस. रवि, डी. शंकर, आर. राजन, पी. पन्नीरसेल्वम और टी. मुरुगन का नाम प्रमुख है। अदालत ने दोषियों पर भारी आर्थिक दंड भी अधिरोपित किया है। एन. गोपालकृष्णन, पी. बालमुरली, आर. वेंकटरमन, एस. रवि और डी. शंकर पर 50-50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जबकि आर. राजन, पी. पन्नीरसेल्वम और टी. मुरुगन को 20-20 लाख रुपये का जुर्माना भरना होगा।

इस धोखाधड़ी का खुलासा 23 सितंबर 2011 को एसबीआई, चेंगलपट्टू के क्षेत्रीय प्रबंधक द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के बाद हुआ। जांच में यह तथ्य सामने आया कि अक्टूबर 2007 से मई 2008 के बीच, बैंक के इन भ्रष्ट अधिकारियों ने एम/एस कांतम्मा मिल्क चिलिंग प्लांट के मालिक के. पुरुषोत्तम के साथ मिलकर एक सुनियोजित षड्यंत्र रचा। उन्होंने फर्जी आवेदनों और दस्तावेजों का सहारा लेते हुए डेयरी विकास के नाम पर 728 फर्जी ऋण स्वीकृत किए। इन ऋणों की कुल राशि 2,32,96,000 रुपये थी, और निर्धारित बैंकिंग प्रक्रियाओं का घोर उल्लंघन करते हुए की गई इस हेराफेरी के कारण बैंक को 1,97,27,692 रुपये का सीधा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।

सीबीआई ने 25 जून 2013 को इस मामले में दस आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। हालांकि, मुकदमे की लंबी कानूनी प्रक्रिया के दौरान दो मुख्य आरोपी के. पुरुषोत्तम और के. रविचंद्रन का निधन हो गया, जिससे उनके खिलाफ मामला समाप्त कर दिया गया। अदालत ने शेष आठ आरोपियों को दोषी पाते हुए उन्हें सजा सुनाई, जो बैंकिंग धोखाधड़ी करने वालों के लिए एक कड़ा संदेश है।