Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
हरियाणा में जन शिकायतों पर सीएम नायब सिंह सैनी का बड़ा एक्शन! प्रशासनिक सचिव रोज करेंगे जनसंवाद पोर्... तुर्की में जलस्तर घटा तो प्राचीन सभ्यता दिखने लगी पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सब-रजिस्ट्रार मौखिक रूप से नहीं रोक सकते रजिस्ट्री, देना ह... जींद के नरवाना में सावन की पहली बारिश ने खोली नगर परिषद की पोल, सड़कें बनीं दरिया पंजाब के मंत्री संजीव अरोड़ा को सुप्रीम कोर्ट से झटका! AIIMS की रिपोर्ट के बाद मेडिकल जमानत याचिका ख... गोराया में दर्दनाक हादसा! ट्रक ने एक्टिवा को मारी टक्कर, मासूम बच्ची की मौके पर मौत; मां घायल नूरपुरबेदी में बारिश ने मचाई तबाही! बंगाला बस्ती जलमग्न, ब्लॉक कृषि कार्यालय में 80 क्विंटल बीज और म... बठिंडा में बरनाला लाठीचार्ज के विरोध में 'पंजाब बंद' का व्यापक असर! मुख्य बाजार रहे बंद, सफाई सेवकों... फतेहगढ़ साहिब में भीषण सड़क हादसा! ट्रक-स्कूटी की टक्कर के बाद लगी भयानक आग; 2 लोगों की जिंदा जलकर द... लुधियाना में पहली ही बारिश में डूबे बाजार! 3-4 फीट पानी भरने से व्यापारियों का भारी नुकसान, भड़के दु...

देश के सर्वोच्च संवैधानिक भवन ‘राष्ट्रपति भवन’ में रचा गया इतिहास, बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति का दिखा अप्रतिम वैभव

नई दिल्ली: देश के सर्वोच्च संवैधानिक भवन ‘राष्ट्रपति भवन’ में एक नया ऐतिहासिक अध्याय लिखा गया। इतिहास में पहली बार बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक-परंपराओं, अद्वितीय कला और पारंपरिक वेशभूषा का अप्रतिम वैभव नजर आया। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में पहुंचे बस्तर के 209 सदस्यीय विशाल प्रतिनिधिमंडल का आत्मीय स्वागत करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने न केवल खुद सभी अतिथियों को भोजन परोसा, बल्कि विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा और ‘बस्तर पंडुम’ उत्सव में शामिल होने की हार्दिक इच्छा भी जताई। इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रपति को बस्तर की 300 साल पुरानी ‘झिटकू-मिटकी’ ढोकरा कलाकृति भेंट की, जिसे देखकर राष्ट्रपति अभिभूत नजर आईं।

🍽️ राष्ट्रपति भवन में विशेष भोज का आयोजन, राष्ट्रपति मुर्मु ने अतिथियों को खुद परोसा भोजन

महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर पंडुम-2026 के विजेता प्रतिभागियों, परगना मांझी, मांझी, चालकी और पद्मश्री से सम्मानित विभूतियों के सम्मान में राष्ट्रपति भवन में विशेष भोज का आयोजन किया।

इस दौरान राष्ट्रपति ने स्वयं सभी अतिथियों को भोजन परोसकर अद्वितीय आत्मीयता का परिचय दिया। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के साथ अनौपचारिक चर्चा करते हुए बस्तर की जनजातीय संस्कृति, लोककलाओं, परंपरागत सामाजिक व्यवस्था और बस्तर पंडुम के भव्य आयोजन से जुड़े अनुभवों की जानकारी ली। उन्होंने बस्तर के कलाकारों और पारंपरिक जनजातीय प्रमुखों का उत्साहवर्धन करते हुए उनकी सांस्कृतिक विरासत की मुक्तकंठ से सराहना की।

🪅 बस्तर दशहरा और बस्तर पंडुम में शामिल होने की इच्छा, राष्ट्रपति बोलीं- “मांझी मेरे परिवार का हिस्सा हैं”

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विशेष आग्रह पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बस्तर के विश्वप्रसिद्ध दशहरा और बस्तर पंडुम उत्सवों में शामिल होने की सहर्ष स्वीकृति दी और कहा कि वे भविष्य में इन आयोजनों में अवश्य शिरकत करेंगी।

राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर का अनूठा दशहरा उनके हृदय को विशेष रूप से स्पर्श करता है। उन्होंने भगवान जगन्नाथ की काष्ठ निर्मित प्रतिमा और बस्तर दशहरा की अनूठी परंपराओं का स्मरण करते हुए अपना आत्मीय जुड़ाव व्यक्त किया। उन्होंने एक भावुक क्षण में कहा कि मांझी समाज उनके परिवार का हिस्सा है और उनके पूज्य पिता भी मांझी थे।

🌟 बस्तर आज शांति, विकास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की नई पहचान के साथ बढ़ रहा है आगे

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संबोधन में कहा कि बस्तर पंडुम छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय परंपराओं और लोककलाओं का एक जीवंत उत्सव है, जिसने बस्तर की वास्तविक सकारात्मक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर स्थापित किया है।

उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर मिला है, साथ ही स्थानीय पर्यटन और रोजगार को भी नई दिशा मिली है। राष्ट्रपति ने बस्तर में शिक्षा, सड़क, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभूतपूर्व विस्तार की सराहना करते हुए कहा कि मांझी और चालकी समाज तथा प्रशासन के बीच एक प्रभावी सेतु का कार्य कर रहे हैं।

🏛️ “पहली बार राष्ट्रपति भवन में दिखा ऐसा अद्भुत दृश्य”: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की सराहना

इस ऐतिहासिक अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अपने विचार व्यक्त किए।

उन्होंने कहा कि वे अनगिनत बार राष्ट्रपति भवन आए हैं, लेकिन पहली बार राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में बस्तर की पारंपरिक और विहंगम आदिवासी वेशभूषा में इतने बड़े प्रतिनिधिमंडल को देखना उनके लिए एक अत्यंत सुखद और गर्व का अनुभव है।

🤝 “छत्तीसगढ़ और बस्तर के लिए अत्यंत गौरव का क्षण”: सीएम विष्णुदेव साय ने बयां किया अनुभव

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राष्ट्रपति से बस्तर के प्रतिनिधिमंडल की यह आत्मीय और ऐतिहासिक भेंट पूरे छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गौरव और सम्मान का विषय है।

उन्होंने कहा, “आज बस्तर शांति, विकास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की नई पहचान के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है। बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों ने हमारी जनजातीय अस्मिता को राष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा दिलाई है। राष्ट्रपति के स्नेह और मार्गदर्शन से हमारी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को एक नई ऊर्जा और प्रेरणा मिलेगी।”

🗿 300 वर्ष पुरानी अमर प्रेमगाथा का प्रतीक ‘झिटकू-मिटकी’ की कलाकृति राष्ट्रपति को की गई भेंट

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को बस्तर की लोकआस्था, प्रेम और समर्पण का प्रतीक मानी जाने वाली ‘झिटकू-मिटकी’ की ढोकरा शिल्प कलाकृति स्मृति-चिह्न के रूप में भेंट की।

झिटकू-मिटकी बस्तर अंचल की लगभग 300 वर्ष पुरानी अमर प्रेमगाथा का प्रतीक है। जनश्रुति के अनुसार, भीषण अकाल के दौरान झिटकू और मिटकी ने अपने त्याग और समर्पण की अनूठी मिसाल पेश की थी, जिसके कारण उन्हें देवतुल्य स्थान मिला। आज भी बस्तर में झिटकू को ‘खोड़िया राजा’ और मिटकी को ‘गप्पा देई’ के रूप में पूजा जाता है। इस प्रतिनिधिमंडल में उप मुख्यमंत्री व गृह मंत्री विजय शर्मा, संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल, पद्मश्री सम्मानित हस्तियां और वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।