खगोल वैज्ञानिकों ने आंकड़ों के विश्लेषण से निष्कर्ष निकाला
वहां के भूगर्भ में अत्यधिक हलचल है
नीचे सक्रिय ज्वालामुखी भी संभव है
दस हजार किलोमीटर लंबी घाटियां बनी
राष्ट्रीय खबर
रांचीः यूं तो शुक्र को सौरमंडल के सबसे कठिन और वीरान ग्रहों में गिना जाता है। इसकी सतह का तापमान कई सौ डिग्री सेल्सियस तक पहुँच जाता है, और यहाँ पृथ्वी की तरह विशाल महासागर भी मौजूद नहीं हैं। लंबे समय तक खगोलविदों का यही मानना था कि शुक्र ग्रह भूगर्भीय रूप से पूरी तरह निष्क्रिय या मृत हो चुका है। हालाँकि, हालिया वैज्ञानिक अनुसंधानों ने इस धारणा को बदल दिया है। नए साक्ष्यों से संकेत मिलता है कि शुक्र आज भी भूगर्भीय रूप से जीवित है और इसके धरातल के नीचे सक्रिय ज्वालामुखी व टेक्टोनिक हलचलें मौजूद हो सकती हैं।
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शुक्र ग्रह पर टेक्टोनिक गतिविधियों का सबसे बड़ा प्रमाण यहाँ पाई जाने वाली विशाल रिफ्ट घाटियाँ हैं। पृथ्वी पर ईस्ट अफ्रीकन रिफ्ट जैसी घाटियाँ मौजूद हैं, लेकिन शुक्र की रिफ्ट घाटियाँ 10,000 किलोमीटर तक फैली हुई हैं। वैज्ञानिक लंबे समय से इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं थे कि इन विशाल घाटियों का निर्माण कब हुआ था। कई भू-वैज्ञानिकों का अनुमान था कि ये संरचनाएँ 10 करोड़ साल से भी अधिक पुरानी हैं और ग्रह की सतह पर संरक्षित प्राचीन अवशेष मात्र हैं।
प्रसिद्ध शोध पत्रिका नेचर जिओसाइंस में प्रकाशित ईटीएच ज्यूरिख के एक नए अध्ययन ने इस पुरानी अवधारणा को चुनौती दी है। जियोडायनामिक्स के प्रोफेसर तारास गेरिया के नेतृत्व और शी यांग के शोध पर आधारित इस अध्ययन में उन्नत 3डी कंप्यूटर मॉडल का उपयोग किया गया। शोधकर्ताओं ने शुक्र की सतह के खिंचाव और बदलाव का अत्यंत सटीक और यथार्थवादी अध्ययन किया।
परिणामों से पता चला कि जब रिफ्ट घाटियाँ भूगर्भीय रूप से युवा होती हैं, तो उनके किनारों पर ऊँचे और चौड़े टीले या रिफ्ट फ्लैंक्स बनते हैं। मॉडल के अनुसार, शुक्र की ये घाटियाँ पहले के अनुमानों से कहीं अधिक तीव्र गति से फैल रही हैं—लगभग 3 से 10 सेंटीमीटर प्रति वर्ष। जब टेक्टोनिक हलचल बंद होती है, तो सतह के तनावमुक्त होने के कारण ये टीले धीरे-धीरे समतल होने लगते हैं। 1990 के दशक में नासा के मैगलेन अंतरिक्ष यान द्वारा ली गई तस्वीरों में भी ऐसे ही ऊँचे रिफ्ट फ्लैंक्स देखे गए थे। इससे स्पष्ट होता है कि शुक्र पर कुछ रिफ्ट घाटियाँ हाल ही के समय में बनी हैं और ग्रह का आंतरिक भाग काफी सक्रिय है।
भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए मार्गदर्शक
यह खोज भविष्य के वीनस मिशनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगी। नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी शुक्र के अध्ययन के लिए नए अभियानों की तैयारी कर रहे हैं। ईएसए का ईनविजन मिशन, जो 2030 के दशक की शुरुआत में लॉन्च होगा, शुक्र के आंतरिक कोर से लेकर उसके वायुमंडल तक का गहन अध्ययन करेगा। यह नया मॉडल उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद करेगा जहाँ वर्तमान में भी ज्वालामुखी या टेक्टोनिक गतिविधियाँ जारी हो सकती हैं। इसके अलावा, इससे यह समझने में भी मदद मिलेगी कि पथरीले ग्रह कैसे विकसित होते हैं और सौरमंडल के बाहर अन्य ग्रहों की खोज कैसे की जाए।
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