प्रधान से पहले भी कई केंद्रीय मंत्रियों ने इस्तीफा दिया है
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः नीट परीक्षा पत्र लीक घोटाले को लेकर हफ़्तों से जारी व्यापक छात्र आंदोलन के ऐतिहासिक मोड़ पर पहुँचने के बाद, 25 जुलाई 2026 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और छात्र-नेतृत्व वाली कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा नैतिक जवाबदेही की मांग को लेकर चलाए गए 26 दिवसीय अनशन ने इस आंदोलन को अभूतपूर्व गति दी। कांग्रेस और विभिन्न छात्र संगठनों के संयुक्त दबाव के चलते धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा अपरिहार्य हो गया, जिससे देश में राजनीतिक जवाबदेही की बहस पुनः जीवित हो उठी है।
भारत के संसदीय इतिहास में जब भी नैतिक जिम्मेदारी या बड़े घोटालों के चलते मंत्रियों के पद छोड़ने की बात आती है, तो कई ऐतिहासिक उदाहरण सामने आते हैं। स्वतंत्र भारत में नैतिक जवाबदेही की सबसे बड़ी मिसाल पूर्व रेल मंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने कायम की थी। तमिलनाडु के अरियालुर में हुए भीषण ट्रेन हादसे में 150 से अधिक यात्रियों की जान चली जाने के बाद, शास्त्री जी ने हादसे की पूरी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए 25 नवंबर 1956 को इस्तीफा दे दिया था।
तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के अनिच्छुक होने के बावजूद शास्त्री जी अपने फैसले पर अडिग रहे। 1962 के भारत-चीन युद्ध में देश को मिली सामरिक विफलता और सैन्य तैयारियों में कमियों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्कालीन रक्षा मंत्री वी. के. कृष्ण मेनन को अपने पद से त्यागपत्र देना पड़ा था। एक निजी कंपनी से वित्तीय लाभ लेने के आरोपों (सिराजुद्दीन मामले) के बाद तत्कालीन केंद्रीय खान एवं ईंधन मंत्री के. डी. मालवीय ने इस्तीफा दिया था, जिसे भारत के शुरुआती कॉर्पोरेट-राजनीतिक घोटालों में गिना जाता है। 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद देश में सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।