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हिमालय के पश्चिमी इलाकों में मॉनसून का जानलेवा प्रकोप

पुंछ और राजौरी में बारह लोगों की मौत

राष्ट्रीय खबर

श्रीनगरः जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती जुड़वां जिलों पुंछ और राजौरी में कुदरत के ढाए कहर से भीषण तबाही मची है। रविवार को क्षेत्र में हुई मूसलाधार बारिश के चलते अचानक आई विकराल फ्लैश फ्लड और जगह-जगह हुए भूस्खलन (लैंडस्लाइड) की चपेट में आने से कम से कम 12 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग मलबे और पानी के तेज बहाव में लापता बताए जा रहे हैं। आपदा की भयावहता को देखते हुए सेना, आपदा प्रबंधन बल और स्थानीय प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है।

अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस प्राकृतिक तबाही का सबसे खौफनाक मंजर पुंछ जिले की सूरनकोट तहसील में देखने को मिला, जहां से सर्वाधिक मौतों की पुष्टि हुई है। लगातार हो रही भारी बारिश, धुंध और भूस्खलन के कारण क्षतिग्रस्त हुई प्रमुख सड़कों ने राहत टीमों की राह में बड़ी बाधाएं खड़ी कर दी हैं, जिससे लापता लोगों तक पहुँचने में रेस्क्यू टीमों को भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।

सूरनकोट के निचले मुराह गांव में रविवार तड़के तबाही का सबसे बड़ा हादसा तब हुआ जब पहाड़ का एक विशाल हिस्सा खिसककर एक रिहाइशी मकान पर आ गिरा। इस भयानक भूस्खलन में मकान ताश के पत्तों की तरह जमींदोज हो गया और अंदर सो रहे एक ही परिवार के सभी आठ सदस्य मलबे के नीचे जिंदा दफन हो गए, जिससे पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।

क्षेत्र में तेजी से बिगड़ते हालात और प्राकृतिक आपदा से मची भारी तबाही की खबर मिलते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर नई दिल्ली में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन में शामिल होने गए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने संवेदनशीलता दिखाते हुए अपना दिल्ली दौरा तुरंत रद्द कर दिया। वे जमीनी हालात का प्रत्यक्ष जायजा लेने और राहत कार्यों की कमान संभालने के लिए दोपहर में ही तत्काल जम्मू लौट आए।

दूसरी ओर, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भारी बारिश और बाढ़ प्रभावित जिलों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। उन्होंने जिला प्रशासन, पुलिस और नागरिक सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए। उपराज्यपाल ने अधिकारियों को स्पष्ट हिदायत दी कि प्रभावित परिवारों को बिना किसी देरी के त्वरित राहत सामग्री, आपातकालीन चिकित्सा सहायता और वित्तीय अनुग्रह राशि प्रदान की जाए। इसके साथ ही, नदियों के जलस्तर पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है और निचले व संवेदनशील इलाकों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित आश्रय स्थलों में स्थानांतरित किया जा रहा है।