Breaking News in Hindi

निर्मोही अखाड़ा ने अर्जी दी, हमें मिले जिम्मेदारी

राम मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन का मामला भी शीर्ष अदालत में

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान राशि के पारदर्शी प्रबंधन को लेकर जारी विवाद के बीच धार्मिक व राजनीतिक गलियारों में सरगर्मियां तेज हो गई हैं। मंदिर परिसर में कथित वित्तीय अनियमितताओं के सामने आने और प्रबंधन में सुधार की कवायद के बीच निर्मोही अखाड़े ने सर्वोच्च अदालत का रुख किया है। शीर्ष अदालत में दायर इस नई याचिका में मांग की गई है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे और दैनिक व्यवस्था में निर्मोही अखाड़े को उचित, आनुपातिक और प्रभावी प्रतिनिधित्व सौंपा जाए।

ट्रस्ट के पदेन सदस्य और निर्मोही अखाड़े के प्रमुख महंत दिनेंद्र दास ने मीडिया से बातचीत करते हुए अपना दर्द साझा किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में आए सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले में निर्मोही अखाड़े के ऐतिहासिक दावों को स्वीकारते हुए ट्रस्ट में उन्हें समुचित स्थान देने के स्पष्ट निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद, पिछले कुछ वर्षों से उन्हें मंदिर के मुख्य प्रबंधन से किनारे रखा गया और कोई महत्वपूर्ण भूमिका नहीं दी गई। महंत दिनेंद्र दास ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि यदि ट्रस्ट अखाड़े को राम लला की दैनिक पूजा-अर्चना, भोग और धार्मिक अनुष्ठानों के संचालन का पूरा दायित्व सौंपता है, तो अखाड़ा परंपराओं का पालन करते हुए इस पवित्र जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा और श्रद्धा से निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सर्वोच्च अदालत में दाखिल हुई इस नई याचिका के तकनीकी और कानूनी पहलुओं की विस्तृत जानकारी उन्हें व्यक्तिगत रूप से फिलहाल नहीं है।

मंदिर की वर्तमान व्यवस्था पर संतोष व्यक्त करते हुए महंत दिनेंद्र दास ने बताया कि हालिया विवादों के बाद दर्शन और सेवा व्यवस्थाओं में व्यापक सुधार किए गए हैं। अब सभी धार्मिक कार्य रामानंदी वैष्णव परंपरा के नियमों के अनुसार सुचारू रूप से संचालित हो रहे हैं। दान राशि की सुरक्षा और गिनती में पूर्ण पारदर्शिता बरती जा रही है, तथा प्रतिदिन प्राप्त होने वाले चढ़ावे की गणना कर उसे कड़ी सुरक्षा के बीच तत्काल बैंक खातों में जमा कराया जा रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच 22 जुलाई को राम मंदिर ट्रस्ट की एक बेहद महत्वपूर्ण और निर्णायक बैठक होने जा रही है। इस बैठक में ट्रस्ट के रिक्त पड़े पदों को भरने, प्रशासनिक ढांचे को पुनर्गठित करने तथा वित्तीय सुरक्षा के नए कड़े नियम लागू करने पर विचार-विमर्श किया जाएगा। वहीं, इसके ठीक अगले दिन 23 जुलाई को वैष्णव संप्रदाय के तीनों प्रमुख अखाड़ों—निर्मोही, निर्वाणी और दिगंबर—के वरिष्ठ संतों की एक साझा बैठक बुलाई गई है। संत समाज के इस सामूहिक मंथन में जो फैसले लिए जाएंगे, उन पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।