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सूर्य के जैसा तारा अपने ही ग्रह को निगल रहा है

तेरह सौ प्रकाश वर्ष की दूरी पर वैज्ञानिकों को दिखा अजीब नजारा

  • तारा का नाम रखा गया है टीओआई-5882

  • इस तारा में लिथियम की मात्रा अधिक है

  • अपने सूर्य और धरती का यही हाल होगा

राष्ट्रीय खबर

रांचीः खगोलविदों को ऐसे मजबूत सबूत मिले हैं कि पृथ्वी से लगभग 1,300 प्रकाश वर्ष दूर स्थित, सूर्य जैसे एक तारे टीओआई-5882ने अपने ही एक ग्रह को निगल लिया है। यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन की खगोलविद ब्रुक कॉटन के नेतृत्व में एक टीम ने इस तारे की रासायनिक संरचना में एक महत्वपूर्ण सुराग खोजा है। टीओआई-5882में लिथियम की मात्रा उम्मीद से कहीं ज्यादा है। रिपोर्ट की मुख्य लेखिका और यू-एम डिपार्टमेंट ऑफ एस्ट्रोनॉमी की रिसर्चर ब्रुक कॉटन ने कहा, आप जो खाते हैं, वही बनते हैं, है ना? इसलिए यदि कोई तारा किसी ग्रह को खाता है, तो उसमें बहुत सारा लिथियम आ जाएगा।

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खगोलविद इस घटना को एंगल्फमेंट कहते हैं। ब्रह्मांडीय समय के पैमाने पर ये घटनाएं बेहद तेजी से होती हैं, जो कभी-कभी केवल कुछ दिनों या हफ्तों तक ही चलती हैं। प्रक्रिया इतनी संक्षिप्त होने के कारण वैज्ञानिकों के लिए इसे लाइव देखना लगभग असंभव है। इसके बजाय, उन्हें ग्रह के नष्ट होने के बाद बचे रासायनिक निशानों की खोज करनी होती है।

इन घटनाओं की पहचान करना सीखने से खगोलविदों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि तारे कितनी बार ग्रहों को निगलते हैं। हमारे अपने सौर मंडल का भी भविष्य में ऐसा ही हश्र होने की उम्मीद है। लगभग 5 अरब वर्षों में, सूर्य अपने जीवन के अंतिम चरण में पहुंचकर एक रेड जाइंट (लाल दानव) बन जाएगा और बुध, शुक्र व संभवतः पृथ्वी को भी निगल जाएगा।

टीओआई-5882का आकार अभी इतना नहीं बढ़ा है कि वह अकेले किसी ग्रह को निगल सके। इसलिए शोधकर्ताओं का मानना है कि इस तारे को किसी और से मदद मिली होगी। दरअसल, एक विशाल गैसीय पिंड भी टीओआई-5882की परिक्रमा कर रहा है, जो बृहस्पति से 20 गुना अधिक विशाल है लेकिन एक वास्तविक तारा बनने के लिए बहुत छोटा है। खगोलविद इसे ब्राउन ड्वार्फ (भूरा बौना) कहते हैं। इस ब्राउन ड्वार्फ ने लापता ग्रह की कक्षा को बाधित कर उसे तारे की ओर धकेल दिया होगा।

मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर सेठ जैकबसन ने बताया कि लिथियम की मात्रा के आधार पर अनुमान है कि निगला गया ग्रह पृथ्वी और नेपच्यून के द्रव्यमान के बीच का रहा होगा। 14 शोधकर्ताओं की टीम ने स्पेक्ट्रोस्कोपी (प्रकाश विश्लेषण) का उपयोग करके टीओआई-5882की तुलना समान उम्र, द्रव्यमान और तापमान वाले 62 तारों से की। यूनिवर्सिटी ऑफ विस्कॉन्सिन की मेलिंडा सोआरेस-फुरटाडो ने कहा कि डेटा को घुमाने की जरूरत नहीं है, टीओआई-5882में लिथियम का स्तर 97वें पर्सेंटाइल में है, जो इसे बेहद दुर्लभ और पुख्ता सबूत बनाता है।

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