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जापान की पीएम ताकाइची से मोदी की वार्ता

भारत और जापान के बीच ए आई, धातु और ऊर्जा पर समझौता

  • आर्थिक सुरक्षा भी मजबूत करेंगे दोनों

  • वर्तमान दौर में सहयोग और जरूरी है

  • यस बैंक में बीस फीसद साझेदारी

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्लीः भारत और जापान ने गुरुवार को पारस्परिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, धातुओं, ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही दोनों एशियाई देशों ने आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक संयुक्त रोडमैप तैयार करने का भी निर्णय लिया है।

यह ऐतिहासिक समझौता भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के बीच नई दिल्ली में हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद हुआ। जापानी प्रधानमंत्री ताकाइची इस समय भारत के तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर हैं। बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए ताकाइची ने कहा, जापान और भारत एक साथ मजबूत और समृद्ध होने के लिए एक-दूसरे की ताकतों का लाभ उठाएंगे। वर्तमान वैश्विक उथल-पुथल के माहौल में, इस तरह के पूरक और सहयोगात्मक संबंध बनाना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।

यह दौरा पिछले वर्ष प्रधानमंत्री मोदी की टोक्यो यात्रा के बाद हो रहा है, जहां जापान ने अगले दशक में भारत में अपने निवेश को दोगुना से अधिक कर 61 अरब डॉलर से अधिक करने का संकल्प लिया था, जो दोनों देशों के गहरे आर्थिक संबंधों को दर्शाता है।

भारतीय सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025/26 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 27.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वहीं, अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच भारत में जापानी निवेश 3.2 अरब डॉलर रहा। भारतीय विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा, उभरती प्रौद्योगिकियों, रक्षा और जन-जन के बीच संपर्क (पीपल-टू-पीपल एक्सचेंज) सहित भारत-जापान संबंधों के पूरे स्पेक्ट्रम पर व्यापक चर्चा की। इस दौरान आर्थिक सुरक्षा, ऊर्जा लचीलापन और एआई पर तीन महत्वपूर्ण दस्तावेजों को अपनाया गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, जापान की सटीक तकनीक (प्रिसिजन टेक्नोलॉजी) और भारत की सॉफ्टवेयर क्षमताओं का मिलन वैश्विक एआई विकास को एक नई गति और ताकत देगा। इसके अलावा, क्वाड समूह के सदस्य देशों के रूप में, दोनों देशों ने रक्षा क्षेत्र में अपने पहले सह-विकास प्रोजेक्ट पर भी हस्ताक्षर किए हैं। जापान भारत के सबसे बड़े निवेशकों में से एक है, जो मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर जैसी प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का वित्तपोषण कर रहा है। हाल ही में जापानी कंपनियों ने यस बैंक में 20 फीसद हिस्सेदारी के लिए 1.6 अरब डॉलर का सौदा भी किया है।