अपने रिफाइनरियों पर यूक्रेनी हमलों से गहराया संकट
एजेंसियां
मास्को: वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बेहद अप्रत्याशित और ऐतिहासिक उलटफेर देखने को मिल रहा है। दुनिया के सबसे बड़े तेल और प्राकृतिक गैस उत्पादकों में शुमार रूस ने अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत से गैसोलीन (पेट्रोल) का आयात करना शुरू कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के अनुसार, मॉस्को को यह कदम अपने देश के भीतर पैदा हुई ईंधन की भारी किल्लत और गहराते संकट के कारण उठाना पड़ा है। प्रचुर मात्रा में कच्चे तेल का भंडार होने के बावजूद रूस का भारत से परिष्कृत (रिफाइंड) ईंधन खरीदना अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और व्यापार जगत में एक असाधारण और विस्मयकारी कदम माना जा रहा है।
यह आयात दोनों देशों के बीच ऊर्जा गतिशीलता और पारंपरिक व्यापारिक समीकरणों में आए एक बहुत बड़े रणनीतिक बदलाव का जीवंत प्रतीक है। यदि इतिहास के पन्नों को पलटें, तो कुछ ही समय पहले तक स्थिति बिल्कुल विपरीत थी। इसी साल की शुरुआत में जब ईरान युद्ध के चलते वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति शृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई थी, तब भारत ने अपने घरेलू बाजार में ईंधन की कमी और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए रूस से रियायती दरों पर रिकॉर्ड मात्रा में कच्चे तेल का आयात किया था। लेकिन अब वक्त का पहिया पूरी तरह घूम चुका है और रूस खुद भारत के रिफाइनरी उद्योग पर निर्भर होता दिखाई दे रहा है।
इस अभूतपूर्व संकट के कारणों पर से पर्दा उठाते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने खुद इसी सप्ताह सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया कि देश की प्रमुख तेल रिफाइनरियों पर हुए यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने रूस के घरेलू बुनियादी ढांचे को गहरी चोट पहुँचाई है। इन लगातार हमलों के कारण तेल को पेट्रोल-डीजल में बदलने की रूसी क्षमता प्रभावित हुई है, जिससे देश के भीतर ईंधन का गंभीर टोटा पैदा हो गया है। हालांकि, पुतिन ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस संकट की गंभीरता को थोड़ा कम करके आंकने की कोशिश की है, ताकि देश की आर्थिक साख को ठेस न पहुंचे। इसके बावजूद, विशेषज्ञ इसे दुनिया के शीर्ष ऊर्जा महाशक्ति के लिए एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक संकट मान रहे हैं, जिसने रूस को तेल निर्यातक से तेल आयातक की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया है।