सुपरकंडक्टिविटी को बनाये रखेगी यह विधि
-
तापमान से इसपर प्रभाव नहीं
-
इसमें ऊर्जा की कोई हानि नहीं
-
कॉपर ऑक्साइड की परत से काम
राष्ट्रीय खबर
रांचीः सुपरकंडक्टर्स भविष्य में अति-कुशल इलेक्ट्रॉनिक्स की एक नई पीढ़ी को शक्ति प्रदान करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन बड़ी तकनीकी बाधाओं के कारण यह तकनीक अभी तक मुख्य रूप से प्रयोगशालाओं तक ही सीमित रही है। अब, स्वीडन की चाल्मर्स यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने एक नया दृष्टिकोण विकसित किया है, जो इस क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक का समाधान करता है: उच्च तापमान पर सुपरकंडक्टिविटी को बनाए रखना और साथ ही मजबूत चुंबकीय क्षेत्रों का प्रतिरोध करना।
देखें इससे संबंधित वीडियो
आधुनिक डिजिटल उपकरण, डेटा सेंटर और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) नेटवर्क वैश्विक बिजली खपत के 6 से 12 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार हैं। जैसे-जैसे ऊर्जा की मांग बढ़ रही है, शोधकर्ता इलेक्ट्रॉनिक्स को कहीं अधिक कुशल बनाने के तरीके खोज रहे हैं। सुपरकंडक्टर्स विशेष रूप से आकर्षक हैं क्योंकि वे बिना किसी ऊर्जा हानि के विद्युत प्रवाह कर सकते हैं। पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों के विपरीत, जो गर्मी के रूप में ऊर्जा बर्बाद करती हैं, सुपरकंडक्टर्स बिना किसी प्रतिरोध के बिजली का संचार कर सकते हैं। सिद्धांत रूप में, यह पावर ग्रिड, इलेक्ट्रॉनिक्स और क्वांटम तकनीकों को सैकड़ों गुना अधिक कुशल बना सकता है।
सुपरकंडक्टर्स के उपयोग में सबसे बड़ी बाधा तापमान है। कई सुपरकंडक्टर्स केवल शून्य से 200 डिग्री सेल्सियस नीचे के तापमान पर काम करते हैं। इतने कम तापमान को बनाए रखने के लिए जटिल शीतलन प्रणालियों की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, मजबूत चुंबकीय क्षेत्र सुपरकंडक्टिविटी को कमजोर कर सकते हैं या समाप्त कर सकते हैं।
चाल्मर्स की टीम ने एक अलग दृष्टिकोण अपनाया। अध्ययन की मुख्य लेखिका फ्लोरियाना लोम्बार्डी बताती हैं, जिस सतह पर सुपरकंडक्टर टिका होता है, उसे स्कल्प्ट (आकार देना) करके हमने पहले की तुलना में काफी अधिक तापमान पर सुपरकंडक्टिविटी को प्रेरित किया। हमने यह भी पाया कि तेज चुंबकीय क्षेत्रों के संपर्क में आने पर भी सामग्री सुपरकंडक्टिंग बनी रही।
शोधकर्ताओं ने क्यूप्रेट परिवार की एक कॉपर-ऑक्साइड सामग्री के साथ काम किया। सफलता का राज सबस्ट्रेट (आधार) के नैनोस्केल संशोधनों में छिपा था। सबस्ट्रेट पर उच्च तापमान पर वैक्यूम में उपचार करके सूक्ष्म उभार और घाटियाँ बनाई गईं। इन सूक्ष्म विशेषताओं ने उस इलेक्ट्रॉनिक वातावरण को बदल दिया जहाँ सबस्ट्रेट और सुपरकंडक्टिंग परत मिलती हैं, जिससे सुपरकंडक्टिविटी मजबूत हुई।
यह निष्कर्ष सुपरकंडक्टिंग सामग्रियों के बारे में सोचने का एक नया तरीका पेश करते हैं। नई सामग्री खोजने या उनके रसायन विज्ञान को बदलने के बजाय, अब शोधकर्ता उस सतह को इंजीनियरिंग करके प्रदर्शन में सुधार कर सकते हैं जिस पर उन सामग्रियों को उगाया जाता है। यह शोध भविष्य में ऊर्जा-कुशल इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत क्वांटम घटकों के लिए नई राह खोलता है।
#Superconductivity #QuantumPhysics #GreenTech #NanoTechnology #FutureTech #सुपरकंडक्टिविटी #क्वांटमफिजिक्स #ग्रीनटेक #नैनोटेक्नोलॉजी #भविष्यकीतकनीक