मणिपुर में दिनोंदिन बिगड़ते जा रहे हैं सामाजिक हालात
भूपेन गोस्वामी
गुवाहाटी: मणिपुर के कामजोंग जिले में आज अचानक हिंसा भड़क उठी, जहां म्यांमार सीमा के पास स्थित कई गांवों पर आगजनी के हमले किए गए। इस घटना ने पहले से ही अशांत पहाड़ी जिले में तनाव और ज्यादा बढ़ने की आशंका पैदा कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार, इस हिंसा से एक कुकी-बहुल गांव और दो तांगखुल नागा गांव प्रभावित हुए हैं। उपद्रवियों ने कई घरों को आग के हवाले कर दिया। हालांकि, खबर लिखे जाने तक नुकसान के सटीक आकलन या किसी के हताहत होने की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी थी। इस घटना के बाद कुकी और नागा संगठनों के बीच आरोपों का एक नया दौर शुरू हो गया है, जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे पर सुनियोजित तरीके से हमले करने का आरोप लगा रहे हैं।
नागा ग्रामीण अधिकारियों का आरोप है कि कुकी नेशनल आर्मी-बी सहित कुकी सशस्त्र समूह अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास स्थित दो तांगखुल नागा गांवों—कोंगकन थाना और शांगकलोक में घर फूंकने के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने दावा किया कि ये हमले लगभग एक ही समय पर किए गए और कुकी समूहों पर क्षेत्र में तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया। नागा ग्रामीण अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त सुरक्षा बलों की तत्काल तैनाती, शांति बहाली और नागरिक बस्तियों पर हमला करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
दूसरी ओर, कुकी इनपी मणिपुर ने आरोप लगाया कि मैतेई/नागा सीमावर्ती क्षेत्र के फाइमोल गांव पर एनएससीएन-आईएम ने म्यांमार से संचालित होने वाले एक सशस्त्र समूह शान्नी नेशनालिटीज आर्मी के साथ मिलकर हमला किया। केआईएम ने कहा कि फाइमोल के सभी 20 घरों को जलाकर राख कर दिया गया, जिससे पूरी आबादी को वहां से भागने पर मजबूर होना पड़ा।
केआईएम के अनुसार, यह हालिया घटना वर्ष 2026 के दौरान कामजोंग, उखरुल और कांगपोकपी जिलों में कुकी गांवों पर हो रहे लगातार हमलों का ही हिस्सा है। संगठन ने इस साल अलग-अलग आगजनी की घटनाओं में निशाना बनाए गए कई गांवों की सूची भी जारी की, जिनमें के सोंगलुंग, लिटान-सारेइखोंग, सोंगपेल, मुल्लम, लांचल, मोलनोई, खराम वैफेई, लोइबोल खुल्लेन, कुलतुह और फाइमोल शामिल हैं।
दोनों पक्षों ने केंद्र, राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियों से इस संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्र में और अधिक हिंसा को रोकने तथा नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है। फिलहाल, किसी भी पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी है। रिपोर्ट लिखे जाने तक मणिपुर पुलिस, असम राइफल्स या अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने घटनाओं के क्रम की पुष्टि करने या हमलों के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने के संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया था।
सूत्रों के अनुसार, स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं और अधिकारी जमीनी हालात का जायजा ले रहे हैं। यह ताजा हिंसा भारत-म्यांमार सीमा पर बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच हुई है, जहां राज्य भर में कड़े सुरक्षा अभियानों के बावजूद छिटपुट घटनाएं विभिन्न समुदायों के बीच तनाव को लगातार बढ़ावा दे रही हैं।