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अप्रवासी विरोधी आंदोलन के तेवर अत्यंत हिंसक दिखे

कई इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात

एजेंसियां

जोहांसबर्गः दक्षिण अफ्रीका इस समय अपने हालिया इतिहास के सबसे गंभीर आंतरिक संकटों में से एक का सामना कर रहा है। अवैध प्रवासन के खिलाफ शुरू हुए व्यापक और हिंसक प्रदर्शनों ने देश के कई प्रमुख शहरों को अपनी चपेट में ले लिया है। स्थिति इतनी विस्फोटक हो गई है कि सरकार को हजारों पुलिसकर्मियों को सड़कों पर तैनात करना पड़ा है ताकि कानून-व्यवस्था को बहाल किया जा सके। इस अशांति का मुख्य कारण कुछ आयोजकों द्वारा अवैध प्रवासियों को देश छोड़ने के लिए दी गई 30 जून की समय-सीमा थी, जिसके बाद से प्रदर्शनों ने विध्वंसक रूप ले लिया।

इन विरोध प्रदर्शनों में हजारों की संख्या में वे दक्षिण अफ्रीकी नागरिक शामिल हैं जो मुख्य रूप से गरीब हैं या बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि विदेशी प्रवासी उनके रोजगार के अवसरों को छीन रहे हैं। उनका मानना है कि ये प्रवासी कम वेतन पर काम स्वीकार कर लेते हैं, जिससे स्थानीय लोगों के लिए बाजार में टिकना मुश्किल हो गया है। इसके अतिरिक्त, प्रदर्शनकारियों द्वारा विदेशी नागरिकों पर देश में अपराध की दर बढ़ाने का भी आरोप लगाया जा रहा है। यह गुस्सा मंगलवार को सड़कों पर खुलकर सामने आया, जब बड़े समूहों ने जुलूस निकाले और देखते ही देखते स्थिति ने हिंसक मोड़ ले लिया।

हिंसा और लूटपाट की घटनाओं ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, अब तक इन हिंसक संघर्षों में कम से कम चार लोगों की मौत हो चुकी है। कई शहरों से दुकानों को लूटने, संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने और विदेशी प्रवासियों के खिलाफ हमलों की खबरें आ रही हैं। दक्षिण अफ्रीकी पुलिस के लिए इस बड़े पैमाने पर फैली अराजकता को रोकना एक चुनौतीपूर्ण कार्य साबित हो रहा है। पुलिस अधिकारियों को देश भर के संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया गया है, लेकिन प्रदर्शनकारियों की संख्या इतनी अधिक है कि नियंत्रण करना कठिन हो गया है।

यह तनाव रातों-रात पैदा नहीं हुआ है, बल्कि लंबे समय से समाज के निचले तबके में विदेशी प्रवासियों के प्रति बढ़ रही नाराजगी का परिणाम है। दक्षिण अफ्रीका में उच्च बेरोजगारी दर और आर्थिक तंगी ने इस आग में घी का काम किया है। हालांकि, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इस हिंसा की कड़ी निंदा की है और इसे जेनोफोबिक (विदेशी-विरोधी) हिंसा करार दिया है। उनका कहना है कि आर्थिक समस्याओं का ठीकरा प्रवासियों के सिर फोड़ना और हिंसक मार्ग अपनाना न केवल अनैतिक है, बल्कि इससे देश की छवि को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है।