देश में अब नये किस्म की हिंसा से बिगड़ रहा है माहौल
एजेंसियां
केप टाउनः दक्षिण अफ्रीका में एक बार फिर आव्रजन-विरोधी हिंसा का खतरा मंडरा रहा है। एक कट्टरपंथी समूह द्वारा सभी अवैध प्रवासियों को देश छोड़ने के लिए मंगलवार की समय-सीमा निर्धारित किए जाने के बाद, वहां से हजारों प्रवासियों का पलायन शुरू हो गया है। इस तनावपूर्ण स्थिति के कारण पूरे देश में भय का माहौल है।
मार्च के मध्य में शुरू हुई यह अशांति अब और अधिक तीव्र हो गई है। अब तक की हिंसक घटनाओं में कम से कम तीन लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। उपद्रवी समूहों ने भाले, लाठियां और कोड़े जैसे हथियारों से लैस होकर प्रवासियों पर हमले किए हैं और उनके घरों को निशाना बनाकर उन्हें नष्ट कर दिया है।
इस हिंसा के मूल में देश की खराब आर्थिक स्थिति है। आव्रजन-विरोधी समूहों द्वारा बिना किसी ठोस प्रमाण के यह दुष्प्रचार किया जा रहा है कि देश की आर्थिक समस्याओं के लिए प्रवासी जिम्मेदार हैं। इस निराधार दावे ने दक्षिण अफ्रीकी समाज में विदेशियों के प्रति नफरत और आक्रोश को अत्यधिक बढ़ा दिया है, जिसका परिणाम खूनी संघर्ष के रूप में सामने आ रहा है।
सरकार और सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया हालात की गंभीरता को देखते हुए, दक्षिण अफ्रीकी पुलिस ने सुरक्षा के लिए व्यापक तैनाती की तैयारी की है। सरकार ने नागरिकों से कानून को अपने हाथों में न लेने की अपील की है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए निजी क्षेत्र भी आगे आया है; विभिन्न व्यापारिक घरानों ने पुलिस को ड्रोन और हेलीकॉप्टरों के माध्यम से निगरानी और सुरक्षा में मदद करने का संकल्प लिया है।
स्थिति की भयावहता को देखते हुए, पड़ोसी अफ्रीकी देशों ने भी अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उन्हें स्वदेश वापस लाने के लिए विशेष विमान और बसें भेजी हैं। दक्षिण अफ्रीका के लिए यह स्थिति न केवल आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवीय चिंता का विषय भी बन गई है। हिंसा की यह लहर देश की सामाजिक शांति को तार-तार कर रही है, और सरकार पर नागरिकों की जान-माल की रक्षा करने का भारी दबाव है।