राम मंदिर गबन मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
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याचिकाकर्ताओं को भी हिदायत दी गयी है
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स्टैट्स रिपोर्ट पर गौर किया अदालत ने
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दान पर भी निष्पक्ष जांच की मांग है
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान की राशि और कीमती सामानों के कथित गबन के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को जांच टीम का पुनर्गठन करने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि वह चाहेगी कि इस संवेदनशील मामले की जांच किसी वरिष्ठ और अनुभवी आईपीएस अधिकारी की अगुवाई में कराई जाए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मिले नकद दान, सोने और अन्य कीमती उपहारों में हुई कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि मामले में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है। उन्होंने कोर्ट को सूचित किया कि अब तक इस मामले में 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और जांच के लिए एक एसआईटी का गठन भी कर दिया गया है। हालांकि, स्टेटस रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद पीठ ने एसआईटी की मौजूदा संरचना पर सवाल उठाए और राज्य सरकार से दो से तीन दिनों के भीतर निर्देश लेकर आने को कहा ताकि जांच की कमान किसी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को सौंपी जा सके।
सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ताओं के वकीलों को कड़ी फटकार लगाते हुए मामले को राजनीतिक रंग न देने की चेतावनी दी। मुख्य न्यायाधीश ने सख्त लहजे में कहा, इसमें कोई राजनीति मत खेलिए। यह आपराधिक कानून के तहत सीधा-साधा अपराध का मामला है। इसके लिए केवल एक निष्पक्ष और उचित जांच की जरूरत है, जिसे उसके अंजाम तक पहुंचाया जाएगा।
एक याचिकाकर्ता के वकील ने दावा किया कि मंदिर निर्माण के दौरान देशभर से दान एकत्र कर रसीदें तो जारी की गईं, लेकिन कई राशियां ट्रस्ट के आधिकारिक खातों में दर्ज ही नहीं हुईं। उन्होंने मांग की कि सभी रसीदों का ब्योरा ट्रस्ट की वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाए। इस पर अदालत ने माना कि दान का उचित रिकॉर्ड रखा जाना चाहिए, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि इस मुद्दे पर व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना होगा।
इसी बीच, निर्मोही अखाड़े ने भी एक अलग याचिका दायर कर ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग उठाई है। अखाड़े का आरोप है कि ट्रस्ट की मौजूदा व्यवस्था और कामकाज सुप्रीम कोर्ट के 2019 के ऐतिहासिक अयोध्या फैसले के निर्देशों के अनुरूप नहीं है। मामले की अगली सुनवाई अब उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एसआईटी के नए स्वरूप पर निर्देश प्राप्त करने के बाद होगी।