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दक्षिण अफ्रीका में संप्रभुता के लिए जोरदार प्रदर्शन

सिरिल रामफोसा और डोनाल्ड ट्रंप का तनाव चरम पर है

जोहांसबर्गः दक्षिण अफ्रीका के मानवाधिकार दिवस के अवसर पर हजारों लोगों ने जोहान्सबर्ग और केप टाउन की सड़कों पर ट्रंप प्रशासन के हस्तक्षेप के खिलाफ प्रदर्शन किया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा व्यापार शुल्क और श्वेत नरसंहार जैसे विवादित दावों को लेकर दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों में भारी कड़वाहट आई है। सत्तारूढ़ दल एएनसी ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी बाहरी शक्ति, विशेषकर अमेरिका को अपने आंतरिक मामलों और नीतियों में दखल देने की अनुमति नहीं देंगे।

दक्षिण अफ्रीका की संप्रभुता और लोकतांत्रिक उपलब्धियों की रक्षा के लिए शनिवार को हजारों नागरिकों ने देशव्यापी मार्च निकाला। यह प्रदर्शन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पिछले कुछ महीनों से व्यापार और नस्लीय संबंधों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बनाए जा रहे निरंतर दबाव के विरोध में आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों का यह हुजूम जोहान्सबर्ग की गगनचुंबी इमारतों के बीच से गुजरते हुए अपनी राष्ट्रीय पहचान और स्वाभिमान का नारा बुलंद कर रहा था।

ऐतिहासिक संदर्भ और वर्तमान कूटनीतिक विवाद यह मार्च दक्षिण अफ्रीका के मानवाधिकार दिवस पर निकाला गया, जो 1960 के शार्पविले नरसंहार की बरसी है। उस समय रंगभेद काल की पुलिस ने अश्वेत प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई थीं। राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा की पार्टी, अफ्रीकी नेशनल कांग्रेस ने इस दिन को अपनी संप्रभुता के बचाव के लिए समर्पित किया।

गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप ने दक्षिण अफ्रीका पर ऊंचे व्यापार शुल्क लगाए हैं और ओवल ऑफिस में रामाफोसा के साथ मुलाकात के दौरान श्वेत नरसंहार के निराधार दावों को लेकर तीखी बहस की थी। ट्रंप ने पिछले साल जोहान्सबर्ग में हुए जी-20 शिखर सम्मेलन का बहिष्कार भी किया था, जिससे संबंधों में दरार और गहरी हो गई थी।

हाल ही में दक्षिण अफ्रीका ने अमेरिकी राजदूत ब्रेंट बोजेल को उनके अलोकतांत्रिक और कूटनीतिक मर्यादा के विपरीत बयानों के लिए तलब किया था। राजदूत ने दक्षिण अफ्रीका में गाए जाने वाले एक विवादित नारे को हेट स्पीच करार दिया था। एएनसी के महासचिव फिकिले मबालुला ने जोहान्सबर्ग के हिलब्रो टावर के पास समर्थकों को संबोधित करते हुए बेहद कड़े शब्दों का प्रयोग किया।

उन्होंने कहा, हम किसी बाहरी व्यक्ति को, जो मानसिक रूप से असंतुलित प्रतीत होता हो, यह अनुमति नहीं दे सकते कि वह हमारे देश में आकर हमें बताए कि हमें क्या करना चाहिए। मबालुला को 2027 के पार्टी कांग्रेस में राष्ट्रपति पद के प्रबल दावेदारों में से एक माना जा रहा है।

मार्च में शामिल 34 वर्षीय निर्माण श्रमिक सियांदा मोलोई ने कहा, हम अपने देश और अपने कानूनों की रक्षा करना चाहते हैं। मुझे उम्मीद है कि अमेरिका तक हमारा संदेश पहुंच जाएगा कि उन्हें हमारे राष्ट्रपति और हमारी नीतियों का सम्मान करना होगा।

एएनसी के रंगों (हरे और पीले) में रंगे समर्थकों ने यह स्पष्ट कर दिया कि दक्षिण अफ्रीका अपनी स्वतंत्रता और संप्रभुता के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। यह विरोध प्रदर्शन न केवल अमेरिका के प्रति नाराजगी जाहिर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि दक्षिण अफ्रीका अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी स्वतंत्र कूटनीतिक पहचान बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।