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Karnataka High Court: वकील के साथ मारपीट करने वाली महिला PSI पर कोर्ट सख्त, लगाया 1 लाख का जुर्माना

कर्नाटक हाईकोर्ट ने पुलिस सब-इंस्पेक्टर (PSI) पद्मावती टीबी को न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करने और अदालत से महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने के लिए कड़ी फटकार लगाई है। न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने पीएसआई की याचिका खारिज करते हुए उन पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना राशि कर्नाटक राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (KSLSA) में जमा करने का आदेश दिया गया है।

🚗 विवाद की शुरुआत: ओवरटेक से मारपीट तक का सफर

यह मामला 23 फरवरी 2025 की रात का है, जब बेंगलुरु में एक वकील और ऑटो रिक्शा चालक के बीच ओवरटेक को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि ऑटो चालक ने वकील की गाड़ी पर पत्थर मारकर शीशा तोड़ दिया। इस मामले में जब वकील शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंचे, तो वहां पुलिस द्वारा सहयोग न मिलने पर स्थिति बिगड़ गई। आरोप है कि इसी दौरान गश्त पर मौजूद पीएसआई पद्मावती ने पुलिस स्टेशन के भीतर वकील के साथ मारपीट की और उन्हें लात भी मारी, जो सीसीटीवी में कैद हो गई।

🕵️‍♀️ तथ्यों को छिपाकर मांगी राहत, कोर्ट ने पकड़ा झूठ

घटना के बाद हाईकोर्ट के निर्देश पर पद्मावती के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद पद्मावती ने उस एफआईआर को रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हैरानी की बात यह रही कि याचिका में उन्होंने यह जिक्र ही नहीं किया कि उक्त एफआईआर खुद हाईकोर्ट के आदेश पर ही दर्ज हुई थी। कोर्ट ने इसे ‘न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग’ करार दिया।

🚫 न्यायिक राहत की हकदार नहीं: हाईकोर्ट

अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि “जो व्यक्ति साफ हाथों से अदालत नहीं आता और तथ्यों को छिपाकर राहत मांगता है, वह न्यायिक राहत का हकदार नहीं हो सकता।” अदालत ने पद्मावती को मिला अंतरिम स्टे ऑर्डर (Stay Order) भी रद्द कर दिया और जांच एजेंसियों को जांच जारी रखने की अनुमति दी। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि जांच रिपोर्ट निचली अदालत के साथ-साथ हाईकोर्ट में भी प्रस्तुत की जाए।