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राम मंदिर दान पर एफआईआर दर्ज की गयी

अत्यधिक विवाद बढ़ने के बाद मजबूरी में कार्रवाई हुई

  • रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गयी है

  • अयोध्या पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की

  • अनेक किस्म की गड़बड़ियों का खुलासा

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण हेतु एकत्रित किए गए दान में हेराफेरी के आरोपों ने एक गंभीर मोड़ ले लिया है। गुरुवार को इन आरोपों के मद्देनजर अयोध्या पुलिस ने एक औपचारिक प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की। यह कार्रवाई एक विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार को सौंपी गई प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर की गई है। इस घटनाक्रम ने न केवल मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि राज्य की राजनीति में भी उबाल ला दिया है।

मामले की पृष्ठभूमि और एसआईटी का गठन मंदिर ट्रस्ट को मिले दान में कथित कुप्रबंधन और हेराफेरी की शिकायतों के बाद, उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को एक एसआईटी का गठन किया था। इस दल का मुख्य उद्देश्य आरोपों की निष्पक्ष जांच करना और सच्चाई सामने लाना था। एसआईटी में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। इन अधिकारियों ने पिछले कुछ दिनों में गहन जांच-पड़ताल की और अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंप दी।

एफआईआर का आधार और कानूनी कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में कुछ मजबूत और सख्त सिफारिशें की हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मामले को लेकर अत्यंत गंभीर हैं और उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जो कोई भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एफआईआर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर दर्ज की गई है।

पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। इनमें मुख्य रूप से धारा 306 (मालिक के कब्जे वाली संपत्ति की चोरी), धारा 316 (आपराधिक विश्वासघात), धारा 317 (बेईमानी से चोरी की संपत्ति प्राप्त करना) और धारा 61 (आपराधिक साजिश) शामिल हैं। इन धाराओं का उपयोग यह दर्शाता है कि प्रशासन इसे एक बड़े आर्थिक अपराध के रूप में देख रहा है।

राजनीतिक सरगर्मी और दबाव यह एफआईआर ऐसे समय में दर्ज हुई है जब इस मुद्दे पर राजनीतिक दबाव बढ़ता जा रहा था। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने भी सार्वजनिक रूप से इन कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग को अपना समर्थन दिया था।

वहीं, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी गुरुवार शाम अयोध्या पहुंचे। उन्होंने मंदिर का दर्शन करने के साथ-साथ इस मुद्दे पर मुखर होकर सरकार से जवाबदेही और दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की। प्रशासन अब एसआईटी की विस्तृत रिपोर्ट और एफआईआर के आधार पर जांच को आगे बढ़ाएगा, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि दान की राशि में किस स्तर पर और किसके द्वारा अनियमितताएं की गईं।