शिवसेना यूबीटी का विभाजन अंततः हो गया
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शिंदे के साथ मंच पर आये नेता
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काफी समय से इसकी चर्चा थी
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दल बदल कानून से बचने की चाल
राष्ट्रीय खबर
मुंबईः ऐसा प्रतीत होता है कि एकनाथ शिंदे ने एक बार फिर बाजी मार ली है। सोमवार शाम मुंबई में उद्धव ठाकरे गुट के नौ में से छह लोकसभा सांसदों ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया, जिससे पिछले कई दिनों से चल रही अटकलों पर विराम लग गया।
बागी सांसदों में ओमराजे निंबालकर (धाराशिव), संजय दीना पाटिल (मुंबई उत्तर-पूर्व), संजय जाधव (परभणी), संजय देशमुख (यवतमाल-वाशिम), नागेश पाटिल अष्टिकर (हिंगोली) और भाऊसाहेब वाकचौरे (शिर्डी) शामिल हैं। यह घटनाक्रम ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों के अलग होकर नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी में विलय के कुछ सप्ताह बाद हुआ है।
एकनाथ शिंदे, जिन्होंने 2022 में विद्रोह का नेतृत्व किया था, ने कहा, छह शेर अब यहाँ आ गए हैं। मैंने उनका असली शिवसेना परिवार में स्वागत किया है। उपमुख्यमंत्री ने ऑपरेशन टाइगर के सफल होने की घोषणा की और इन सांसदों को धुरंधर बताया। अपनी खुशी जाहिर करते हुए शिंदे ने कहा, चार साल पहले, 22 जून 2022 को हमने विद्रोह किया था और हमारे साथ 40 विधायक थे। अब हमने चौका नहीं, छक्का मारा है।
दलबदल कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए बागी गुट को कम से कम छह सांसदों (कुल संख्या का दो-तिहाई) के समर्थन की आवश्यकता थी। दिल्ली में ठाकरे गुट द्वारा बुलाई गई संसदीय दल की बैठक में नौ में से केवल तीन सांसद ही पहुंचे, जिससे विवाद गहरा गया था। संजय राउत पर कटाक्ष करते हुए शिंदे ने कहा, तीन संजय (बागी गुट में तीन संजय हैं) के आने के बाद, अब दूसरे संजय का कोई महत्व नहीं रह गया है। शिंदे ने जोर देकर कहा कि यह बदलाव कानूनी और संवैधानिक रूप से हुआ है।
बागी सांसदों ने विकास निधि की कमी को दलबदल का मुख्य कारण बताया है, जिस पर शिंदे ने विकास कार्यों के लिए भरपूर धन मुहैया कराने का आश्वासन दिया। शिंदे ने कहा, अब हम महाराष्ट्र की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गए हैं। वहीं, शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, एकनाथ शिंदे ने छह गद्दारों को जन्म दिया है। इसके जवाब में उद्धव ठाकरे 27 जून से महाराष्ट्रव्यापी आउटरीच अभियान शुरू करने जा रहे हैं, जिसमें वे बागी सांसदों के निर्वाचन क्षेत्रों का दौरा करेंगे।