महाराष्ट्र की राजनीति में ऑपरेशन टाइगर का दूसरा चरण भी है
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एक एक कदम आगे बढ़ा रहे हैं
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पहले सबसे अधिक सांसद बनेंगे
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उसके बाद विधायकों का नंबर लगेगा
राष्ट्रीय खबर
मुंबईः हाल ही में हुए ऑपरेशन टाइगर की सफलता के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राज्य के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे अब अपनी नजरें मुख्यमंत्री पद पर टिकाए हुए हैं, जो 2024 के विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा के सबसे बड़ी पार्टी (130 सीटें) के रूप में उभरने के कारण उनसे दूर रह गया था।
शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव लोकसभा में शिवसेना के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। वर्तमान में शिवसेना के पास 7 सांसद हैं, लेकिन उद्धव ठाकरे गुट (शिवसेना-यूबीटी) के 6 बागी सांसदों के शामिल होने की अटकलों के बाद यह संख्या बढ़कर 13 हो जाएगी। इस बदलाव के साथ ही, शिवसेना महाराष्ट्र से लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन जाएगी, जो भाजपा के 7 सांसदों की संख्या से कहीं अधिक है। यह संख्यात्मक बढ़त शिंदे गुट के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मोलभाव करने की क्षमता में काफी वृद्धि करेगी।
सूत्रों के अनुसार, ऑपरेशन टाइगर का पहला चरण पूरा होने के बाद, एकनाथ शिंदे अब शिवसेना (यूबीटी) के विधायकों को अपने पाले में लाने की योजना बना रहे हैं। बताया जा रहा है कि शिवसेना (यूबीटी) के कुल 20 विधायकों में से 15 को लुभावने प्रस्तावों के जरिए पार्टी में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, एनसीपी (शरद पवार गुट) के सांसदों को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं, जिन्हें निशाना बनाया जा सकता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इन ऑपरेशनों का मुख्य उद्देश्य एकनाथ शिंदे की राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर स्थिति को मजबूत करना है। शिंदे का खेमा इस बात को लेकर आश्वस्त है कि जब वे एनडीए (NDA) को मजबूत करेंगे और विपक्ष को कमजोर करेंगे, तो वे इनाम के तौर पर मुख्यमंत्री पद की मांग रखने की स्थिति में होंगे।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में एकनाथ शिंदे को देवेंद्र फड़नवीस द्वारा उद्धव ठाकरे के प्रति नरम रुख अपनाए जाने के कारण राजनीतिक रूप से हाशिए पर धकेले जाने की चर्चाएं थीं। हालांकि, अब इन आक्रामक अभियानों के जरिए शिंदे एक बार फिर सत्ता के केंद्र में वापसी की कोशिश कर रहे हैं। यदि ये दोनों ऑपरेशन सफल होते हैं, तो महाराष्ट्र की राजनीति में शक्ति का केंद्र पूरी तरह से परिवर्तित हो जाएगा और एनडीए के भीतर सीटों के बंटवारे व नेतृत्व के समीकरण बदल जाएंगे।