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कर्नाटक एमएलसी चुनाव में कांग्रेस की बड़ी जीत

अपने ही खेमा में सेंधमारी से हतप्रभ है भाजपा के लोग

  • अतिरिक्त वोट एनडीए खेमा से आये

  • भाजपा प्रत्याशियों को कम वोट प्राप्त हुए

  • जेडीएस भी शिवकुमार के खेल में फंस गयी

राष्ट्रीय खबर

बेंगलुरुः बेंगलुरु में हाल ही में संपन्न हुए कर्नाटक विधान परिषद चुनाव के परिणाम भाजपा और जद (एस) के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका बनकर उभरे हैं। सात सीटों के लिए हुए इस चुनाव में क्रॉस-वोटिंग ने खेल पूरी तरह से कांग्रेस के पक्ष में मोड़ दिया, जिससे सत्ताधारी दल को पांच सीटें हासिल हुईं। इस जीत के साथ ही 75 सदस्यीय विधान परिषद में कांग्रेस का बहुमत अब और मजबूत हो गया है, जहाँ उसके पास कुल 39 एमएलसी हो गए हैं। कांग्रेस के लिए यह जीत केवल सीटों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे सरकार की नीतियों और गारंटी योजनाओं पर जनता का अनुमोदन माना जा रहा है।

कांग्रेस ने आसानी से चार सीटें जीतीं और सातवें उम्मीदवार विनय कार्तिक के लिए भी अप्रत्याशित समर्थन प्राप्त किया। विनय कार्तिक को जीत के लिए आवश्यक 28 मतों के मुकाबले 32 प्रथम वरीयता वोट मिले।

भाजपा को दो सीटें मिलीं। हालाँकि, क्रॉस-वोटिंग के कारण भाजपा के लिंगराज पाटिल केवल 27 वोट ही प्राप्त कर सके, जबकि रघु कौटिल्य को 29 वोट मिले। पार्टी को अपने आवंटित 30-30 मतों से कम वोट मिले, जो राज्य नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। जद (एस) के लिए यह चुनाव पार्टी के लिए एकजुटता का टेस्ट था, जिसमें वह विफल रही। 18 सदस्यों वाली पार्टी को केवल 14 वोट मिले।

इस चुनाव को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा था। कांग्रेस द्वारा सातवां उम्मीदवार मैदान में उतारे जाने के बाद जद (एस) ने गोविंद राजू को नामांकित कर चुनाव को दिलचस्प बना दिया था। परिणामों ने साबित कर दिया कि डीके शिवकुमार का राजनीतिक प्रबंधन और रणनीति बेहद सटीक थी, जिसने विपक्ष के खेमे में सेंधमारी कर कांग्रेस को बड़ी बढ़त दिलाई।

कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने बताया कि कांग्रेस को न केवल अपने 135 विधायकों, बल्कि सर्वोदय कर्नाटक पार्टी, निर्दलीय विधायकों और विपक्षी दलों से भी 11 अतिरिक्त वोट मिले। दूसरी ओर, भाजपा और जद (एस) के नेता इस क्रॉस-वोटिंग को लेकर मंथन में जुट गए हैं। यह परिणाम भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र और विपक्ष के नेता आर. अशोक के लिए एक रियलिटी चेक के रूप में देखा जा रहा है।