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प्रियंक ख़डगे के बयान पर सांसद जिगाजिनागी का अजीब बयान

एक दलित कैसे आरएसएस पर सवाल करेगा

  • विजयपुरा में प्रेस वार्ता में दिया बयान

  • अभी राज्य के गृहमंत्री हैं प्रियंक खडगे

  • बयान से राजनीति फिर से गरमा गयी

राष्ट्रीय खबर

बेंगलुरुः विजयपुरा में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए, भारतीय जनता पार्टी के सांसद रमेश जिगाजिनागी ने कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब गृह मंत्री द्वारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर की गई टिप्पणियों पर सांसद ने कड़ा रुख अपनाते हुए सवाल उठाए।

सांसद रमेश जिगाजिनागी ने स्पष्ट रूप से पूछा कि एक दलित व्यक्ति को आरएसएस को लेकर चिंतित होने की आवश्यकता क्यों है? उन्होंने कहा, जिन लोगों ने भी आरएसएस का विरोध करने का साहस किया है, वे राजनीतिक रूप से नहीं टिक पाए हैं। आरएसएस को पंजीकृत  कराने से आपको क्या हासिल होगा? आम जनता से पूछें कि आरएसएस क्या है, वे आपको वास्तविकता बता देंगे। यह गृह मंत्री का काम नहीं है।

सांसद ने इस मुद्दे पर प्रियांक खड़गे पर सीधा हमला करते हुए उनके राजनीतिक अनुभव और कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, उन्हें गृह मंत्रालय केवल इसलिए मिला क्योंकि उनके पिता ने कांग्रेस के लिए काम किया था। उनमें परिपक्वता और समझदारी की कमी है। ऐसी भड़काऊ बयानबाजी करने के बजाय, उन्हें अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और एक अच्छा नाम कमाना चाहिए।

यह बयान अभ कर्नाटक के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। जहां एक ओर कांग्रेस और उसके नेता आरएसएस की विचारधारा पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं, वहीं भाजपा नेता इसे तुष्टिकरण की राजनीति और संघ को बदनाम करने की कोशिश करार देते हैं। सांसद जिगाजिनागी का यह रुख यह दर्शाता है कि भाजपा अपने वैचारिक आधार के बचाव में किसी भी स्तर पर पीछे हटने को तैयार नहीं है।

यह विवाद एक बार फिर राज्य की राजनीति में दलित पहचान, आरएसएस की भूमिका और सरकारी जिम्मेदारियों के बीच के टकराव को उजागर करता है। जहां गृह मंत्री का तर्क संगठन की पारदर्शिता से जुड़ा है, वहीं भाजपा सांसद इसे एक अनावश्यक राजनीतिक एजेंडा मान रहे हैं।