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हिमंत बिस्वा सरमा ने उठाया जनसंख्या बदलाव का मुद्दा

बदलाव का अगला निशाना झारखंड होगा

  • इस मुद्दे पर समग्र ध्यान की जरूरत

  • यह असम के लिए बहुत बड़ा मुद्दा है

  • सीमा वाले राज्यों में सावधानी जरूरी

भूपेन गोस्वामी

गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने हाल ही में अवैध अप्रवास और उसके कारण होने वाले जनसांख्यिकीय (डेमोग्राफिक) बदलावों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। मैन ऑन ए मिशन सत्र के दौरान सरमा ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो झारखंड भी उसी तरह के जनसांख्यिकीय जोखिमों का सामना कर सकता है, जैसा कि असम ने लंबे समय से अनुभव किया है।

सरमा के अनुसार, आजादी के बाद से पूर्वी भारत में जनसंख्या का संतुलन तेजी से बदल रहा है। उन्होंने कहा कि झारखंड की सीमा पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से लगती है, जो स्वयं बांग्लादेश की सीमा से जुड़ा हुआ है। इसी भौगोलिक स्थिति के कारण वहां घुसपैठ की संभावना अधिक है। उन्होंने दावा किया कि अगली जनगणना में झारखंड में डेमोग्राफिक बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे, जिसका असर स्थानीय संस्कृति और क्षेत्रीय स्थिरता पर पड़ सकता है।

अधिकारियों और इंटेलिजेंस रिपोर्टों का हवाला देते हुए सरमा ने बताया कि कैसे बिना दस्तावेजों वाले अप्रवासी खुली सीमाओं का फायदा उठाकर झारखंड में प्रवेश करते हैं। आरोप है कि ये लोग फर्जी पहचान पत्र जैसे कि आधार कार्ड और वोटर कार्ड बनवाकर सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं और स्थानीय आबादी में घुल-मिल रहे हैं। उन्होंने बॉर्डर वाले राज्यों में राष्ट्रीय सुरक्षा और सतर्कता को अत्यंत आवश्यक बताया।

सुरक्षा चुनौतियों के इतर, सरमा ने असम के आर्थिक उत्थान का भी जिक्र किया। उन्होंने राज्य को पूर्वोत्तर के औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित करने की प्रतिबद्धता जताई। मुख्यमंत्री ने गर्व से बताया कि गुवाहाटी में स्थित टाटा सेमीकंडक्टर प्लांट इस वर्ष के अंत तक माइक्रोचिप का निर्यात शुरू करने के लिए तैयार है। सरमा ने निष्कर्ष निकाला कि भारत की भविष्य की आर्थिक तरक्की में पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत की भूमिका निर्णायक होगी, बशर्ते यह क्षेत्र औद्योगिक विस्तार और सुरक्षा उपायों के बीच एक सटीक संतुलन बनाए रखे। उनका मानना है कि आने वाले बीस वर्षों में यह क्षेत्र देश की प्रगति का इंजन बनेगा, लेकिन इसके लिए घुसपैठ जैसी चुनौतियों से पार पाना अनिवार्य है।