मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश को जोड़ने के लिए छतरपुर जिले के नेहरा गांव में केन नदी पर बन रहे पुल के निर्माण कार्य पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पुल का 90 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन उद्घाटन से पहले ही इसकी संरचना में दरारें नजर आने लगी हैं। आरोप है कि निर्माण कंपनी ने इन दरारों को छिपाने के लिए आनन-फानन में सीमेंट का लेप लगा दिया, जो निर्माण में बरती गई लापरवाही और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
📝 पुल का निर्माण और ग्रामीणों की उम्मीदें
लोक निर्माण विभाग के सेतु निगम द्वारा निर्मित यह पुल चंदला थाना इलाके के नेहरा गांव में बनाया जा रहा है। इस पुल के बनने से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच की दूरी करीब 20 किलोमीटर कम हो जाएगी। अभी तक ग्रामीण नाव के सहारे नदी पार करने को मजबूर हैं। साल 2023 में करीब 32 करोड़ रुपये की लागत से शुरू हुए इस पुल का निर्माण कार्य तीन साल बीत जाने के बाद भी अधूरा पड़ा है, जिससे स्थानीय किसानों और आम लोगों में काफी नाराजगी है।
⚠️ क्या है स्थानीय लोगों की चिंता?
स्थानीय निवासी अनंत कुमार शुक्ला और बरदानी सिंह का कहना है कि पुल के पिलरों में पड़ी दरारें भविष्य में किसी बड़े हादसे का संकेत हो सकती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण करने वाली नरसिंहपुर की कंपनी काम अधूरा छोड़कर जा चुकी है। बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने से दर्जनों गांवों का संपर्क टूट जाता है और किसानों को अपनी खेती के लिए लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। पुल के निर्माण में हो रही देरी और खराब गुणवत्ता से ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया है।
🔍 कलेक्टर के निर्देश और जांच की प्रक्रिया
मामले की गंभीरता को देखते हुए छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने बताया कि समीक्षा बैठक में निर्माण कार्य में देरी और गुणवत्ता का मुद्दा सामने आया था। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बारिश के मौसम को देखते हुए काम में सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा जाए। साथ ही, पुल की दरारों और निर्माण सामग्री की जांच के लिए आदेश जारी कर दिए गए हैं, ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।