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देश विश्वास के संकट से भी जूझ रहा हैः सोनम वांगचुक

बेंगलुरू में कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में जबर्दस्त भीड़ जुटी

  • अभिनेता प्रकाश राज भी हुए इसमें शामिल

  • देश में आर्थिक संकट भी बहुत बड़ा है अभी

  • शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर कायम

राष्ट्रीय खबर

बेंगलुरुः सोनम वांगचुक ने रविवार को बेंगलुरू के फ्रीडम पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी के पहले विरोध प्रदर्शन में शिरकत की। भारी बारिश के बावजूद इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया, जिसमें अभिनेता प्रकाश राज, किरण श्रीनिवास और फिल्म निर्माता सेनानी हेगड़े और कृपाकर बी.एस. भी शामिल हुए।

सोनम वांगचुक ने कहा कि भारत न केवल वित्तीय संकट, बल्कि गंभीर विश्वास के संकट से गुजर रहा है। उन्होंने सरकार से जवाबदेही तय करने और प्रेस की आजादी सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, यदि सरकार ऐसा नहीं कर सकती, तो उसे घोषित कर देना चाहिए कि भारत अब लोकतंत्र नहीं, बल्कि एक अधिनायकवादी देश बन गया है।

नीट, सीबीएसई और यूपीएससी जैसी परीक्षाओं में अनियमितताओं को उन्होंने एक गहरी और सड़ी हुई प्रणाली का लक्षण बताया। उन्होंने कहा, यह सिर्फ मापने वाले जार की गलती नहीं है, बल्कि दूध ही सड़ा हुआ है। वांगचुक ने इस बात पर चिंता जताई कि जिस व्यवस्था में भ्रष्टाचार और अनैतिकता को बढ़ावा मिलता हो, वहां से निकलने वाले भविष्य के डॉक्टर या अधिकारी समाज के लिए कितने खतरनाक हो सकते हैं। वांगचुक ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने युवा आईएएस अधिकारियों को दबाव में आकर उन्हें राष्ट्र-विरोधी घोषित करने के लिए मजबूर किया। उन्होंने कहा कि लोगों को डर के साये में नहीं जीना चाहिए।

अभिनेता प्रकाश राज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष करते हुए उनसे चुप्पी तोड़ने की अपील की। उन्होंने पूछा कि जो प्रधानमंत्री पॉलिटिकल साइंस में महारत का दावा करते हैं, वे पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था की राजनीति पर चुप क्यों हैं? उन्होंने कहा कि देश के युवा अब डरने वाले नहीं हैं और वे अपनी भविष्य की लड़ाई खुद लड़ रहे हैं।

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सांप्रदायिक राजनीति को खारिज करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को शहरी नक्सली या देशद्रोही कहकर डराया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि जैसे कॉकरोच डायनासोर से भी ज्यादा समय तक जीवित रहे हैं, वैसे ही यह युवा पीढ़ी भी अन्यायपूर्ण व्यवस्था को मात देगी। इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य युवाओं के भविष्य, उनके सपनों और शिक्षा प्रणाली की पारदर्शिता के लिए आवाज उठाना था।