Sayani Ghosh Political Journey: ममता बनर्जी की ‘शिष्या’ सयानी घोष का हृदय परिवर्तन; टीएमसी छोड़ एनडीए के साथ जाने की चर्चा
कोलकाता: राजनीति में न तो समर्पण स्थायी है और न ही विरोध। इसका सबसे बड़ा उदाहरण बंगाल की राजनीति में सयानी घोष का हालिया रुख है। कभी ममता बनर्जी की सबसे भरोसेमंद सिपहसालार और ‘फायरब्रांड’ युवा नेता के रूप में पहचानी जाने वाली सयानी घोष ने अब पाला बदल लिया है। ममता की सियासी प्रयोगशाला से निकली सयानी का यह ‘हृदय परिवर्तन’ बंगाल की राजनीति के लिए किसी झटके से कम नहीं है।
🚀 ममता की प्रयोगशाला से निकलकर बनीं ‘युवा चेहरा’
वर्ष 2021 में तृणमूल कांग्रेस में कदम रखने वाली बंगाली अभिनेत्री और गायिका सयानी घोष ने बहुत कम समय में खुद को साबित किया। ममता बनर्जी को उस समय ऐसे युवा चेहरों की तलाश थी जो सोशल मीडिया और सड़क, दोनों जगहों पर आक्रामक तरीके से पार्टी का पक्ष रख सकें। सयानी इस कसौटी पर खरी उतरीं। उन्हें युवा तृणमूल कांग्रेस की कमान सौंपी गई—वही पद, जो कभी ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी के पास था।
✨ ‘गुरु गुड़ और चेला शक्कर’ वाली जोड़ी
सयानी घोष को ममता बनर्जी की ‘परछाई’ माना जाता था। उनके भाषणों की शैली, बीजेपी पर तीखे हमले और बंगाली अस्मिता का मुद्दा उठाना—सब कुछ ममता बनर्जी की कार्यशैली का प्रतिबिंब था। सयानी ने भी पार्टी के प्रति अपनी वफादारी का परिचय देते हुए राज्य में युवाओं और महिलाओं के बीच पैठ बनाई। इस जोड़ी को बंगाल में ‘गुरु-शिष्या’ के एक आदर्श उदाहरण के रूप में देखा जाता था।
📉 सत्ता की आंधी और टूटता भरोसा
विधानसभा चुनाव के बाद बंगाल में बदली सियासी परिस्थितियों ने सब कुछ बदल दिया। टीएमसी की सत्ता से बाहर होने की आहट और बीजेपी के उभार ने सयानी घोष को एक नई दिशा में सोचने पर मजबूर कर दिया। माना जा रहा है कि सयानी घोष ने अब हवा का रुख भांप लिया है और टीएमसी के उन बागी सांसदों की सूची में शामिल हो गई हैं, जिन्होंने एनडीए को समर्थन देने का ऐलान किया है।
🎬 सिनेमा से सियासत: सयानी का सफर
आसनसोल दक्षिण से चुनावी पारी का आगाज करने वाली सयानी घोष की हार के बावजूद पार्टी नेतृत्व का उन पर भरोसा कम नहीं हुआ था। उन्होंने न केवल युवाओं को लुभाया, बल्कि अपनी बेबाक शैली से टीएमसी के विजन को एक नई पहचान दी। आज सयानी का बागी रुख यह दर्शाता है कि राजनीति में व्यक्ति की महत्वाकांक्षा और समय के साथ परिस्थितियां किस प्रकार निष्ठाओं को बदल देती हैं।