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ममता के समर्थक भी खुलकर मैदान में उतरे

टीएमसी में ऑपरेशन लोट्स के बाद अब प्रतिक्रिया तेज

  • फर्जी नैरेटिव फैलाया जा रहा है

  • भय या लालच के आगे नहीं झूकेंगे

  • जिन्हें जाना है वह पद से इस्तीफा दें

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस के भीतर इन दिनों आंतरिक कलह, गुटबाजी और कुछ नेताओं के पाला बदलने की अटकलों को लेकर भारी सियासी घमासान मचा हुआ है। इस संकट की घड़ी में पार्टी के प्रमुख स्तंभ और वरिष्ठ सांसद खुलकर अपनी सुप्रीमो ममता बनर्जी के समर्थन में उतर आए हैं। सांसद सागरिका घोष, महुआ मोइत्रा, कीर्ति आज़ाद और डेरेक ओब्रायन ने न केवल ममता बनर्जी के नेतृत्व के प्रति अपनी अटूट निष्ठा दोहराई है, बल्कि विद्रोह की राह पर चल रहे बागियों और भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है।

राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बेहद कड़े संदेश के जरिए अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उनका सार्वजनिक जीवन में आने का मुख्य उद्देश्य देश के लोकतांत्रिक ताने-बाने को बचाना और भाजपा की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ लड़ना है। उन्होंने ममता बनर्जी के असाधारण नेतृत्व को सभी महिलाओं और नागरिकों के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

उन्होंने कहा, यह बेहद अजीब और शर्मनाक संस्कृति है कि नेता किसी एक पार्टी के सिंबल और एक लोकप्रिय चेहरे के दम पर चुनाव जीतते हैं, मतदाताओं से उसी एजेंडे पर वोट मांगते हैं, लेकिन जैसे ही पार्टी को हार का सामना करना पड़ता है, वे तुरंत पाला बदल लेते हैं। यदि आपकी वफादारी और सिद्धांत केवल जीत तक ही सीमित हैं, तो जनता के जनादेश का कोई मोल नहीं रह जाता। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह पर परोक्ष हमला करते हुए कहा कि विपक्ष के नेताओं को डरा-धमकाकर या लालच देकर कतार में खड़ा करना पूरी तरह से अनैतिक है। उनके इस संदेश को पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता डेरेक ओब्रायन ने भी री-पोस्ट कर अपना समर्थन दिया।

पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आज़ाद ने भी ममता बनर्जी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि वे अंतिम सांस तक दीदी के साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तैर रही बागियों की सूची को सिरे से खारिज करते हुए इसे भाजपा द्वारा फैलाया गया फर्जी नैरेटिव करार दिया। आज़ाद ने दावा किया कि सूची में शामिल कम से कम छह सांसदों ने किसी भी तरह के दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से साफ इनकार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा केंद्रीय जांच एजेंसियों जैसे ईडी, सीबीआई  और पुलिस का डर दिखाकर टीएमसी नेताओं को ब्लैकमेल करने और तोड़ने की कोशिश कर रही है क्योंकि वे हताश हैं। उन्होंने बागियों को चुनौती दी कि वे छिपकर वार करने के बजाय खुलकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करें और अपनी स्थिति स्पष्ट करें।

अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए जानी जाने वाली टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा ने भी विद्रोहियों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि साल 2024 में जनता ने इन सांसदों को टीएमसी के सिंबल पर जिताया था, न कि एनडीए  के लिए। मोइत्रा ने चुनौती देते हुए कहा कि जितने भी स्वार्थी और लालची नेता भाजपा में जाना चाहते हैं, वे तुरंत अपनी सांसदी से इस्तीफा दें और भगवा दल के टिकट पर दोबारा चुनाव लड़कर अपनी लोकप्रियता साबित करें।