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बाज़ार से निकली 2.67 लाख करोड़ रुपये की विदेशी पूँजी

सरकार और रिजर्व बैंक की कोशिशों का कोई असर नहीं

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारतीय वित्तीय बाज़ार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की भारी बिकवाली ने आर्थिक हलकों में चिंता बढ़ा दी है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाज़ार से लगभग 2.67 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि वापस निकाल ली है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव और घरेलू बाज़ार के उच्च मूल्यांकन के कारण विदेशी फंडों की इस रिकॉर्ड निकासी ने घरेलू शेयर बाज़ारों पर भारी दबाव डाला है। इसके परिणामस्वरूप प्रमुख सूचकांकों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे खुदरा और संस्थागत दोनों प्रकार के निवेशकों का मनोबल प्रभावित हुआ है।

इस अभूतपूर्व पूँजी निकासी के बीच, वित्तीय बाज़ार के दिग्गजों, ब्रोकिंग संस्थाओं और बाज़ार विश्लेषकों ने सरकार और नियामक संस्थाओं से बाज़ार में निवेशकों का भरोसा वापस बहाल करने के लिए तत्काल कदम उठाने का अनुरोध किया है। शेयर बाज़ार से जुड़े विभिन्न हितधारकों की ओर से यह ज़ोरदार माँग उठ रही है कि विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए नियमों और कर नीतियों में राहत दी जाए। वर्तमान कर व्यवस्था, विशेष रूप से दीर्घकालिक और अल्पकालिक पूँजीगत लाभ कर और कुछ नियामक अनुपालन, विदेशी निवेशकों को भारतीय बाज़ार में दीर्घकालिक पूँजी लगाने से हतोत्साहित कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार आगामी नीतियों में विदेशी निवेशकों के लिए कर संरचना को सरल बनाती है या उन्हें कुछ विशेष रियायतें देती है, तो बाज़ार में लिक्विडिटी (तरलता) की कमी को दूर किया जा सकेगा। इसके अलावा, विदेशी पूँजी की वापसी को रोकने के लिए नियमों को अधिक पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया जा रहा है। बाज़ार का कहना है कि चीन और अन्य उभरते बाज़ारों से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच भारतीय बाज़ार की साख बनाए रखने के लिए यह राहत पैकेज या नीतिगत सुराहा बेहद ज़रूरी हो चुका है, ताकि देश की आर्थिक संवृद्धि की गति प्रभावित न हो।