निजी जंगल के विकास से बाघ पहुंचा
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काले तेंदुए और जंगली भैसा पहले आये
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पश्चिमी घाट के जंगलों की नई सफलता
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एईआरएफ फाउंडेशन के प्रयास सफल हुए
राष्ट्रीय खबर
मुंबईः महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के एक निजी स्वामित्व वाले जंगल में लगे कैमरा ट्रैप ने दशकों से प्रतीक्षित उस दृश्य को कैद कर लिया है, जिसके लिए संरक्षणवादी वर्षों से संघर्ष कर रहे थे। एक रॉयल बंगाल टाइगर को उस परिदृश्य से गुजरते हुए देखा गया है, जो लगभग 18 साल पहले बड़े पैमाने पर वनों की कटाई और विनाश के खतरे का सामना कर रहा था। शोधकर्ताओं का मानना है कि इस बाघ के अलावा काले तेंदुए और गौर (बिसन) जैसे वन्यजीवों की उपस्थिति इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि उत्तरी पश्चिमी घाटों के निजी जंगलों में चलाए जा रहे दीर्घकालिक संरक्षण कार्य सफल हो रहे हैं।
यह उपलब्धि पुणे स्थित एप्लाइड एनवायर्नमेंटल रिसर्च फाउंडेशन (एईआरएफ) के फील्ड शोधकर्ताओं को मिली है। यह सफलता उनके माईफॉरेस्ट पहल के 18 साल बाद हासिल हुई है, जो भारत की पहली प्रोत्साहन-आधारित निजी वन संरक्षण परियोजना है। संरक्षणवादी अर्चना गोडबोले और जयंत सरनाइक ने बताया कि बाघ को संगमेश्वर के कुली-फंसावले गलियारे में एक संरक्षण समझौते के तहत आने वाले निजी वन क्षेत्र में देखा गया। उनके इस कार्य को यूके के वर्ल्ड लैंड ट्रस्ट का समर्थन प्राप्त है।
अर्चना गोडबोले ने इसे एक स्वर्ण क्षण बताते हुए कहा कि जब उन्होंने यह कार्य शुरू किया था, तब कई लोग संशय में थे, लेकिन उन्होंने पारिस्थितिक रूप से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र को बचाने का दृढ़ निश्चय किया था। यह बाघ की उपस्थिति इस बात की पुष्टि करती है कि उनकी मेहनत सही दिशा में है। सरनाइक के अनुसार, इस खोज का महत्व इसलिए और भी बढ़ जाता है क्योंकि ये क्षेत्र सरकारी संरक्षित क्षेत्रों के बजाय निजी स्वामित्व वाले वन हैं, जो आमतौर पर लॉगिंग और भूमि उपयोग परिवर्तन के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
वर्ष 2007 में एईआरएफ द्वारा शुरू की गई इस पहल में भूमि मालिकों को जंगल काटने के बजाय उन्हें संरक्षित करने के लिए मुआवजा दिया जाता है। 2009 में जो कार्य केवल 100 एकड़ से शुरू हुआ था, वह अब बढ़कर 14,000 एकड़ तक पहुँच गया है। बाघ की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि स्थानीय समुदायों को भागीदार बनाने से संरक्षण कार्य को बड़े पैमाने पर सफलता मिल सकती है। यह घटना दर्शाती है कि भारत में वन्यजीवों के दीर्घकालिक अस्तित्व के लिए संरक्षित क्षेत्रों के बाहर के भूदृश्यों को बचाना कितना महत्वपूर्ण है।