कैक्टस की धीमी वृद्धि के पीछे तीव्र विकासवादी गति
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फूलों से इस बारे में जानकारी मिली
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रेगिस्तानी इलाके में धीरे बढ़ते हैं वे
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कठिन माहौल में यह बदलाव हो रहा
राष्ट्रीय खबर
रांचीः आमतौर पर रेगिस्तान की तपती धूप में बेहद धीमी गति से बढ़ने वाले कैक्टस को धैर्य का प्रतीक माना जाता है। लेकिन हालिया वैज्ञानिक शोध ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। ‘यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग‘ के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि कैक्टस की प्रजातियाँ वास्तव में पृथ्वी पर सबसे तेजी से विकसित होने वाले पौधों के समूहों में से एक हैं। यह शोध बताता है कि जिसे हम एक कठोर और स्थिर पारिस्थितिकी तंत्र समझते हैं, वह वास्तव में तीव्र प्राकृतिक परिवर्तनों का केंद्र है।
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दशकों से जीवविज्ञानी यह मानते आए थे कि नए पौधों की प्रजातियों के निर्माण के पीछे परागणकों और अत्यधिक विशिष्ट फूलों की संरचना का मुख्य हाथ होता है। यह विचार चार्ल्स डार्विन के समय से चला आ रहा था। लेकिन रीडिंग विश्वविद्यालय के शोध दल ने जब 750 से अधिक कैक्टस प्रजातियों के फूलों की लंबाई और उनके विकास का विश्लेषण किया, तो परिणाम चौंकाने वाले थे।
कैक्टस के फूलों के आकार में भारी विविधता देखी गई, जहाँ कुछ फूल मात्र 2 मिलीमीटर के थे, वहीं कुछ 37 सेंटीमीटर तक बड़े थे। हालांकि, शोध में पाया गया कि फूलों के आकार या उनकी लंबाई का नई प्रजातियों के बनने की दर से कोई सीधा संबंध नहीं है। इसके बजाय, सबसे महत्वपूर्ण कारक पुष्प विकास की गति पाई गई। जिन कैक्टस प्रजातियों के फूलों के आकार और रूप में समय के साथ सबसे तेजी से बदलाव आया, उन्हीं प्रजातियों से नई शाखाएं और नई प्रजातियां विकसित होने की संभावना सबसे अधिक रही।
संरक्षण के लिए नई राह वर्तमान में कैक्टस की लगभग 1,850 ज्ञात प्रजातियां हैं और इनमें से करीब एक-तिहाई विलुप्ति के कगार पर हैं। बायोलॉजी लेटर्स में प्रकाशित इस अध्ययन के मुख्य लेखक जेमी थॉम्पसन के अनुसार, यह खोज वन्यजीव संरक्षण की दिशा में क्रांतिकारी साबित हो सकती है। अब तक संरक्षणवादी किसी विशेष लक्षण (जैसे फूल का प्रकार या आकार) के आधार पर जोखिम का आकलन करते थे, लेकिन अब उन्हें यह देखना होगा कि कोई प्रजाति कितनी तेजी से विकसित हो रही है।
शोध का नया आधार इस व्यापक अध्ययन को संभव बनाने के लिए कैक्टईकोडीबी नामक एक ओपन-एक्सेस डेटाबेस का उपयोग किया गया। इसे सात वर्षों के कठिन शोध के बाद तैयार किया गया है, जिसमें कैक्टस के लक्षणों, उनके आवास और विकासवादी संबंधों का विवरण है। यह डेटाबेस भविष्य में जलवायु परिवर्तन के प्रति इन पौधों की प्रतिक्रिया को समझने में वैज्ञानिकों की मदद करेगा।
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