अलग किस्म की चुनौतियों में घिर गया है कनाडा देश
एजेंसियां
ओटावाः कनाडा के तेल और खनिज संपन्न प्रांत अल्बर्टा में एक ऐतिहासिक राजनीतिक मोड़ देखने को मिल रहा है। वहां के अलगाववादी समर्थकों ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि उन्होंने प्रांत को कनाडा से अलग कर एक स्वतंत्र राष्ट्र बनाने के मुद्दे पर जनमत संग्रह आयोजित करने के लिए 3 लाख से अधिक हस्ताक्षर जुटा लिए हैं।
नागरिक नेतृत्व वाली इस याचिका के लिए आवश्यक 1.78 लाख हस्ताक्षरों की सीमा को पार करना इस आंदोलन की बढ़ती ताकत का संकेत है। हालांकि, इन हस्ताक्षरों के सत्यापन की प्रक्रिया वर्तमान में एक कानूनी चुनौती के कारण रुकी हुई है, जिस पर न्यायाधीश का फैसला आना बाकी है।
अल्बर्टा में अलगाववाद का मुद्दा दशकों पुराना है, लेकिन 2025 के संघीय चुनाव में प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व वाली लिबरल पार्टी की जीत के बाद इसमें जबरदस्त तेजी आई है।
अल्बर्टा प्रोस्पेरिटी प्रोजेक्ट जैसे समूहों का तर्क है कि स्वतंत्रता से प्रांत को आर्थिक समृद्धि, राजनीतिक सशक्तिकरण और वैश्विक मंच पर एक बेहतर स्थान मिलेगा। अल्बर्टा की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से तेल, गैस और खनन पर टिकी हुई है। स्थानीय निवासियों और रूढ़िवादी पार्टी के समर्थकों का आरोप है कि संघीय लिबरल सरकार ने पिछले एक दशक में पाइपलाइन परियोजनाओं को रोककर और तेल-गैस उद्योगों के खिलाफ नीतियां बनाकर प्रांत के आर्थिक हितों को नुकसान पहुँचाया है।
यदि यह प्रस्ताव मतपत्र पर आता है, तो मतदाताओं से सीधा सवाल पूछा जाएगा: क्या आप सहमत हैं कि अल्बर्टा प्रांत को कनाडा का हिस्सा बने रहना छोड़ देना चाहिए और एक स्वतंत्र राज्य बन जाना चाहिए? अल्बर्टा की प्रीमियर डेनिएल स्मिथ ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार स्वयं पृथकतावाद का समर्थन नहीं करती, लेकिन यदि नागरिक याचिका कानूनी रूप से सफल होती है, तो वह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करते हुए इसे 2026 के प्रांतीय जनमत संग्रह में शामिल करेंगी।
हालांकि, स्वतंत्रता की राह इतनी आसान नहीं है। प्रथम राष्ट्र समूहों ने इस कदम के खिलाफ मुकदमा दायर किया है, जिनका तर्क है कि कनाडा से अलग होना उनके संधि अधिकारों का उल्लंघन होगा। इसके अलावा, जनमत सर्वेक्षणों के आंकड़े भी अलगाववादियों के पक्ष में नहीं दिख रहे हैं। सीबीसी न्यूज के हालिया सर्वे के अनुसार, केवल 27 प्रतिशत लोग ही अलग होने के पक्ष में हैं, जबकि 67 प्रतिशत जनता कनाडा के साथ बने रहना चाहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जनमत संग्रह पास हो भी जाता है, तो भी स्वतंत्रता के लिए संघीय सरकार और स्वदेशी समूहों के साथ लंबी और जटिल कानूनी व राजनीतिक वार्ताओं का दौर चलेगा।