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Naxal Funding Alert: केंदू पत्ते के कारोबार से नक्सलियों की करोड़ों की लेवी वसूली पर पुलिस की नज़र; बढ़ाई गई निगरानी

पलामू: 15 मई से झारखंड में केंदू पत्ता (बीड़ी पत्ता) की तुड़ाई शुरू हो जाएगी. केंदू पत्ता की तुड़ाई का कार्य मानसून के आगमन तक जारी रहेगा. नक्सली संगठनों की भी नजर इसपर रहती है. वे इस कारोबार से करोड़ों की रकम वसूलते रहे हैं. पुलिस ने भी केंदू पत्ता को लेकर हाई अलर्ट जारी किया है और नक्सली संगठनों के खिलाफ निगरानी बढ़ा दी है.

दरअसल, प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी, टीएसपीसी और जेजेएमपी जैसे नक्सल संगठन बेहद ही कमजोर हो गए हैं. भाकपा माओवादी के पास पांच से छह, टीएसपीसी के तीन से चार कमांडर बचे हैं जबकि जेजेएमपी जैसा नक्सली संगठन खत्म हो चुका है. स्थिति बेहद कमजोर होने के बावजूद ये नक्सली संगठन बीड़ी पत्ता के कारोबार से लेवी वसूलने की फिराक में हैं. आशंका जताई जा रही है कि केंदू पत्ता के पैसे से नक्सली खुद को मजबूत कर सकते हैं या खुद को सुरक्षित रखने में इस पैसे का इस्तेमाल कर सकते हैं.

नक्सली संगठन प्रतिबैग 70 से 80 रुपये वसूलते हैं लेवी

केंदू पत्ते के कारोबार में नक्सली संगठन प्रति बैग 70 से 80 रुपए लेवी वसूलते हैं. यह लेवी पलामू, गढ़वा, लातेहार के साथ बिहार के गया और औरंगाबाद के सीमावर्ती इलाके से वसूली जाती है. टीएसपीसी जैसी नक्सल संगठन अपने प्रभाव वाले इलाके में 60 से 70 रुपए प्रतिबैग लेवी वसूलता है जबकि जेजेएमपी अपने प्रभाव वाले इलाके में 35 से 40 रुपए प्रति बैग वसूलता है.

माओवादी अपने मध्यजोन पलामू, गढ़वा, चतरा, गया औरंगाबाद और कोयल शंख जोन के लातेहार से सालाना 25 से 30 करोड़ रुपए की लेवी वसूलते हैं. केंदू पत्ता से लेवी वसूलने के लिए नक्सली संगठन हिंसक घटनाओं को अंजाम देते हैं. आंकड़ों के अनुसार, 2022 में 17 हिसंक घटनाओं को अंजाम दिया गया था, जबकि 2022 से 2025 के बाद पलामू, गढ़वा, लातेहार के इलाके में 15 के करीब हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया गया है.

नक्सली संगठनों के आर्थिक ढांचे के खिलाफ लगातार कार्रवाई हुई है. लेवी वसूलने वालों के खिलाफ पुलिस ने चेतावनी जारी की है. यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि किसी भी प्रकार से नक्सली संगठन या आपराधिक तत्व अवैध वसूली ना करें”– किशोर कौशल, डीआईजी, पलामू

दक्षिण भारत और पश्चिम बंगाल भेजा जाता है केंदू पत्ता

पलामू, गढ़वा और लातेहार के इलाके से निकलने वाला केंदू पत्ता दक्षिण भारत और पश्चिम बंगाल के इलाके में भेजा जाता है. मई के दूसरे सप्ताह से इसका कारोबार शुरू होता है और बरसात की शुरुआत तक किया जाता है. जंगल मे मजदूर केंदू पत्ता की तुड़ाई करते हैं और बाद में उसे सुखाते हैं. सूखने के बाद केंदू पत्तों को संबंधित ठेकेदार को सौंप दिया जाता है.

2026 में प्रति बोरा मजदूरी 1921 रुपए निर्धारित की गयी है. 2018 में प्रति बोरा 1883 रुपये मजदूरी निर्धारित की गयी थी. पलामू, गढ़वा, लातेहार का केंदू पत्ता बीड़ी के उत्पादन के लिए बेस्ट क्वालिटी का माना जाता है, दूसरे राज्यों में इसकी काफी मांग है.

पलामू से निकलता है 95 हजार बोरा केंदू पत्ता

पलामू जिले से सालाना प्रतिवर्ष 90 से 95 हजार बोरा केंदू पत्ता निकलता है. एक बोरे में 1000 के करीब बंडल होता है और हर एक बंडल में 50 केंदू पत्ता होता है. प्रति वर्ष 4.5 अरब पत्तों की तुड़ाई होती है. इस कार्य में प्रत्यक्ष तौर पर 20,000 लोगों को रोजगार मिलता है जबकि अप्रत्यक्ष तौर पर 10,000 करीब लोगों को रोजगार मिलता है. पलामू को 35 अलग-अलग क्षेत्रों में बांटकर पत्तों की तुड़ाई शुरू होती है. जबकि लातेहार और गढ़वा के इलाके को अलग-अलग क्षेत्रो में बांटकर पत्तो को तोड़ा जाता है.